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Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में विलुप्त हो रही कला-संस्कृति को मिला नया मंच

Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में विलुप्त हो रही कला-संस्कृति को मिला नया मंच
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Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: ग्वालियर। ग्वालियर में आयोजित 'रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव 2025' ने ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड की समृद्ध कला-संस्कृति को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में आयोजित इस कॉन्क्लेव ने विलुप्त हो रही परंपरागत कलाओं को पुनर्जनन का एक बड़ा मंच प्रदान किया है। इस आयोजन ने स्थानीय कलाकारों को न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि देशभर में अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर दिया है।

Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: पारंपरिक कलाओं को नया जीवन


कॉन्क्लेव में ग्वालियर, चंबल, और बुंदेलखंड क्षेत्र की कई पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया गया। ग्वालियर के परिहार परिवार की पांचवीं पीढ़ी द्वारा बनाई जाने वाली बत्तों बाई की गुड़िया आज भी जीवंत है। इसी तरह, माहौर परिवार की चौथी पीढ़ी कागज के खिलौनों की कला को संजोए हुए है। वहीं, बुंदेलखंड के प्रजापति परिवार की पांचवीं पीढ़ी टेराकोटा कला को जीवित रखते हुए इसे लोगों तक पहुंचा रही है। इन कलाकारों ने कॉन्क्लेव को अपनी कला को व्यापक स्तर पर ले जाने का एक अनमोल अवसर बताया।

Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: कलाकारों ने जताया आभार

स्थानीय कलाकारों ने मध्यप्रदेश सरकार और कॉन्क्लेव के आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि इस मंच ने उनकी कला को न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक कलाकार ने कहा, "रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ने हमें अपनी कला को दुनिया के सामने लाने का मौका दिया। यह हमारी परंपराओं को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक शानदार प्रयास है।"


Gwalior Regional Tourism Conclave-2025: पर्यटन के साथ कला-संस्कृति का संरक्षण

रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया। इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों, और सांस्कृतिक समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला, जिससे उनकी कला को वैश्विक मंच पर पहचान मिलने की संभावना बढ़ी है।


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