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Uttarakhand News: देहरादून में रैपिड ट्रांजिट सिस्टम: मेट्रो की जगह बाई-आर्टिकुलेटेड बसें लाने की तैयारी

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Uttarakhand News: देहरादून में रैपिड ट्रांजिट सिस्टम: मेट्रो की जगह बाई-आर्टिकुलेटेड बसें लाने की तैयारी
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Uttarakhand News: देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में यातायात की समस्या को दूर करने के लिए अब मेट्रो लाइट या नियो मेट्रो की बजाय बाई-आर्टिकुलेटेड बसें (द्वि-संयुक्त बसें) चलाने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूकेएमआरसी) ने स्विस कंपनी एचईएसएस के साथ अप्रैल में समझौता किया था। कंपनी ने शहर के यातायात दबाव और पीक आवर में यात्रियों की संख्या के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट की प्रस्तुति सितंबर में शासन के सामने होगी।

Uttarakhand News: ये बसें बैटरी से चलती हैं, जिसमें दो कोच जुड़े होते हैं और फ्लैश चार्जिंग तकनीक से तेजी से चार्ज होती हैं। शहर में इनकी स्पीड 30-40 किमी प्रति घंटा होगी, जो सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हैं। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन, स्विट्जरलैंड और फ्रांस में इनका सफल संचालन हो रहा है। हाल ही में लैटिन अमेरिका में भी परीक्षण हुआ।

Uttarakhand News: पहले चरण में दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं: आईएसबीटी से गांधी पार्क (8.523 किमी, 10 स्टेशन) और एफआरआई से रायपुर (13.901 किमी, 15 स्टेशन)। ये 42 वार्डों की 40% आबादी को कवर करेंगे। दूसरे चरण में रेलवे स्टेशन से पंडितवाड़ी (4.65 किमी, 6 स्टेशन), गांधी पार्क से आईटी पार्क (6.2 किमी, 7 स्टेशन) समेत कई रूट शामिल हैं। फेस-2 में गांधी पार्क से मैक्स अस्पताल (6.8 किमी, 7 स्टेशन) और अन्य विस्तार होंगे।

Uttarakhand News: यह सिस्टम मेट्रो से सस्ता लेकिन रोपवे से महंगा होगा। पहले की डीपीआर में मेट्रो लाइट की लागत 91-110 करोड़ रु./किमी, रोपवे 103-126 करोड़ रु./किमी और मेट्रो नियो 40-50 करोड़ रु./किमी थी। केंद्र ने मई 2025 में मेट्रो नियो को ई-बस और बीआरटीएस से संभालने का सुझाव देकर लौटा दिया। यूकेएमआरसी अब इस नए प्रस्ताव को शासन से मंजूरी के बाद केंद्र भेजेगा।


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