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LPG Crisis News: होर्मुज का सीना चीर भारत पहुंचे नंदा देवी और जग लाडकी जहाज, सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
LPG Crisis News: नई दिल्ली/गुजरात। ईरान क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत के लिए मंगलवार को राहत भरी खबर सामने आई है। कतर से एलपीजी और कच्चा तेल लेकर रवाना हुए दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से भारत के तट पर पहुंच गए हैं। इन जहाजों के सुरक्षित आगमन से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है।
LPG Crisis News: एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ मंगलवार सुबह गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर पहुंच गया। यह जहाज 1 मार्च को कतर के रास लाफान बंदरगाह से रवाना हुआ था और लगभग दो सप्ताह की समुद्री यात्रा के बाद भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुआ। अधिकारियों के अनुसार, जहाज सफलतापूर्वक वाडिनार एंकरेज पर पहुंच चुका है।
LPG Crisis News: इससे पहले, ‘शिवालिक’ नामक एक अन्य एलपीजी टैंकर भी लगभग 45-46 हजार टन एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका था। दोनों जहाज मिलकर करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत लेकर आए हैं। ये जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व में हैं।
LPG Crisis News: वहीं, ‘जग लाडकी’ नामक जहाज, जो संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा था, वह भी सुरक्षित रूप से मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया है। सभी जहाजों और उनमें सवार भारतीय नाविकों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।
LPG Crisis News: बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद सभी टैंकर सुरक्षित रूप से खुले समुद्र में प्रवेश कर गए थे। LPG Crisis News: उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में कार्यरत सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में कुल 22 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें 611 नाविक सवार थे।
LPG Crisis News: क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए चिंता का विषय बना रहता है।
LPG Crisis News: मंत्रालय ने बताया कि देश के प्रमुख बंदरगाह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और शिपिंग कंपनियों तथा अन्य हितधारकों को हर संभव सहायता दी जा रही है। इसमें लंगर, किराया और भंडारण शुल्क में रियायतें भी शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है, और ऐसे में समय पर कूटनीतिक प्रयास बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
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