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Global credit rating agency Fitch: फिच ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग 'BBB-' पर बरकरार रखी, जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान
- Pradeep Sharma
- 25 Aug, 2025
Global credit rating agency Fitch: नई दिल्ली। ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ 'BBB-' पर बरकरार रखा है। एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में
Global credit rating agency Fitch: नई दिल्ली। ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ 'BBB-' पर बरकरार रखा है। एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% की मजबूत दर से बढ़ सकती है। फिच ने कहा कि जीएसटी सुधार और अन्य नीतिगत कदम इस वृद्धि को समर्थन देंगे। हालांकि, ऊंचा कर्ज स्तर भारत की क्रेडिट क्वालिटी के लिए चुनौती बना रहेगा।
Global credit rating agency Fitch: ट्रंप टैरिफ से जोखिम, लेकिन सीमित प्रभाव
फिच ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर प्रस्तावित 50% टैरिफ ग्रोथ के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। फिर भी, एजेंसी का मानना है कि ये टैरिफ अंततः कम हो सकते हैं। भारत की जीडीपी में अमेरिकी निर्यात की हिस्सेदारी केवल 2% होने के कारण टैरिफ का सीधा असर सीमित होगा। हालांकि, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं निवेश और कारोबारी सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती हैं। फिच ने कहा कि अगर भारत पर टैरिफ अन्य एशियाई देशों की तुलना में अधिक रहता है, तो 'चाइना+1' रणनीति से मिलने वाले लाभ कम हो सकते हैं।
Global credit rating agency Fitch: जीएसटी सुधार और नीतिगत कदमों से ग्रोथ को बल
फिच के अनुसार, सरकारी पूंजीगत व्यय, निजी निवेश में धीमा सुधार और अनुकूल जनसांख्यिकी के कारण वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी ग्रोथ 6.4% तक रह सकती है। जीएसटी सुधार और डीरेगुलेशन एजेंडा मांग को बढ़ावा देगा। हालांकि, भूमि और श्रम कानून जैसे सुधार राजनीतिक रूप से जटिल हैं, लेकिन कुछ राज्य इनमें प्रगति दिखा सकते हैं। एजेंसी ने उल्लेख किया कि भारत के हालिया द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के बावजूद, इसके व्यापारिक अवरोध अभी भी ऊंचे हैं।
Global credit rating agency Fitch:मजबूत मांग, लेकिन निजी निवेश में सुस्ती
फिच का कहना है कि पिछले दो वर्षों में भारत की ग्रोथ में मामूली सुस्ती आई है, लेकिन यह अन्य विकासशील देशों की तुलना में मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत मजबूत रहेगी और सरकारी पूंजीगत व्यय से इसे समर्थन मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ के जोखिमों के कारण निजी निवेश की गति धीमी रह सकती है।
फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% होगा, जो वित्त वर्ष 2027 और 2028 में क्रमशः 4.2% और 4.1% तक कम हो सकता है। हालांकि, अधिक पूंजीगत व्यय, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से वेतन-पेंशन में वृद्धि और जीएसटी सुधारों से राजस्व में कमी के कारण घाटा कम करने की गति सीमित हो सकती है।
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