Gyanpeeth Award : छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को मिलेगा ज्ञानपीठ पुरस्कार, सीएम साय ने दी बधाई...
- Rohit banchhor
- 22 Mar, 2025
इस घोषणा के साथ ही छत्तीसगढ़ का नाम एक बार फिर साहित्यिक पटल पर गूंज उठा है।
Gyanpeeth Award : रायपुर। हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर, प्रख्यात कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। ज्ञानपीठ समिति ने 22 मार्च 2025 को नई दिल्ली में इसकी घोषणा की। छत्तीसगढ़ के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि विनोद कुमार शुक्ल इस सम्मान को प्राप्त करने वाले राज्य के पहले साहित्यकार होंगे। इस घोषणा के साथ ही छत्तीसगढ़ का नाम एक बार फिर साहित्यिक पटल पर गूंज उठा है।
Gyanpeeth Award : मुख्यमंत्री ने दी बधाई, कहा- यह गर्व का पल-
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर विनोद कुमार शुक्ल को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हिंदी साहित्य के प्रख्यात उपन्यासकार और कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर बेहद सुखद है। यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी लेखनी ने हमें गौरवान्वित किया है। उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना करता हूँ।
देश के लब्धप्रतिष्ठ उपन्यासकार–कवि आदरणीय विनोद कुमार शुक्ल जी को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का समाचार प्राप्त हुआ है। यह छत्तीसगढ़ के लिये गौरव की बात है। आदरणीय शुक्ल जी को अशेष बधाई। उन्होंने एक बार पुनः छत्तीसगढ़ को भारत के साहित्यिक पटल पर गौरवान्वित… pic.twitter.com/yFjGGPLS2j
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) March 22, 2025
Gyanpeeth Award : कौन हैं विनोद कुमार शुक्ल?
1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल पिछले पांच दशकों से साहित्य साधना में लीन हैं। वर्तमान में वे रायपुर में निवास करते हैं। उनकी पहली कविता लगभग जयहिंद 1971 में प्रकाशित हुई थी, जिसने उनकी साहित्यिक यात्रा की मजबूत नींव रखी। उनकी रचनाएँ सादगी, गहराई और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को शब्दों में पिरोने की कला के लिए जानी जाती हैं।
Gyanpeeth Award : उनकी प्रमुख रचनाएँ-
कविताएँ- लगभग जयहिंद (1971), वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह (1981), सब कुछ होना बचा रहेगा (1992), कविता से लंबी कविता (2001), कभी के बाद अभी (2012) आदि।
उपन्यास- नौकर की कमीज़ (1979), खिलेगा तो देखेंगे (1996), दीवार में एक खिड़की रहती थी (1997), हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ (2011) आदि।
Gyanpeeth Award : अब तक मिले सम्मान-
विनोद कुमार शुक्ल को इससे पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार, रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, और गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। ज्ञानपीठ पुरस्कार उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का सबसे बड़ा प्रमाण है।

