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Kharmas 2026 : इस दिन से शुरु हो रहा हैं खरमास, जानें नियम क्या करें क्या न करें

Dev Verma
Kharmas 2026 : इस दिन से शुरु हो रहा हैं खरमास, जानें नियम क्या करें क्या न करें
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Kharmas 2026 : नई दिल्ली। हिंदू धर्म में खरमास को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है। वर्ष 2026 में सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही 15 मार्च से खरमास आरंभ हो रहा है।

Kharmas 2026 : कब से शुरू होगा खरमास

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य 14 मार्च की मध्य रात्रि 1 बजकर 1 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि यह गोचर मध्यरात्रि में हो रहा है, इसलिए खरमास की शुरुआत 15 मार्च 2026 से मानी जाएगी। यह अवधि लगभग एक महीने तक चलेगी और 14 अप्रैल 2026 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। उस दिन सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्य मेष राशि में गोचर करेंगे, जिसके साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से हो सकेगी।

Kharmas 2026 : खरमास में नहीं किए जाते ये कार्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस समय विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे आयोजन नहीं किए जाते। इसके अलावा नए घर का निर्माण शुरू करना या कोई नया व्यवसाय आरंभ करना भी इस अवधि में उचित नहीं माना जाता। ऐसा करने से आर्थिक नुकसान और कार्यों में बाधा आने की संभावना बताई जाती है। खरमास के दौरान बच्चों के मुंडन संस्कार जैसे पारंपरिक कार्यक्रम भी टाल दिए जाते हैं।

Kharmas 2026 : खरमास में क्या करना होता है शुभ

जहां एक ओर मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है, वहीं धार्मिक और पुण्य कार्यों को इस समय विशेष महत्व दिया जाता है। इस अवधि में जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और अन्न या धन का दान करना शुभ माना जाता है। प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य देना भी लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख-शांति का वातावरण रहता है।

Kharmas 2026 : भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व

खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस अवधि में नियमित रूप से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और भोग में तुलसी के पत्ते अर्पित करते हैं। इसके साथ ही यदि संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


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