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Breaking News: संभल हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश, मस्जिद समिति को उच्च न्यायालय जानें को कहा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संभल जामा मस्जिद मामले में महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए निचली अदालत से इस मामले पर सुनवाई न करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सख्त हिदायत दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले को उच्च न्यायालय में ले जाने को कहा और यह स्पष्ट किया कि अब इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों पर ही की जा सकेगी।
मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई
दरअसल, मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जामा मस्जिद का सर्वे कराने की बात कही गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को इस मामले पर आगे सुनवाई करने से रोका जाए और इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय ही करेगा।
हिंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इस पूरे विवाद के बाद, निचली अदालत के आदेश के मुताबिक एडवोकेट कमिश्नर द्वारा जामा मस्जिद का सर्वे किया गया था। इस सर्वे के दौरान हालात बिगड़े और संभल में हिंसा फैल गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए आदेश दिया कि एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए।
कानून व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को भी निर्देश दिया कि वह शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए। कोर्ट ने इस मामले में प्रशासन की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में साम्प्रदायिक सौहार्द्र को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।
यह मामला उत्तर प्रदेश में धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर चर्चा का विषय बन चुका है और अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस पर आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत होगी।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले चिंता जताई की वहां पर शांति और सद्भाव बरकरार रहे। सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद कमेटी से कहा कि आप इस ऑर्डर को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम ने ये भी कहा है कि 3 दिन के अंदर अगर आप हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते हैं तो मामला हाई कोर्ट में लिस्ट किया जाए और हाई कोर्ट के अगले निर्देश का इंतजार किया जाए। तब तक के लिए ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई रुकी रहेगी।"
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