Mahakumbh 2025 : 45 किलो रुद्राक्ष धारण करने वाले महाराज बने महाकुंभ 2025 में आकर्षण का केंद्र, पढ़ें पूरी खबर...
- Rohit banchhor
- 03 Jan, 2025
यह रुद्राक्ष का वजन 45 किलो से अधिक है, जो उन्हें एक अद्भुत रूप में प्रस्तुत करता है।
Mahakumbh 2025 : प्रयागराज। महाकुंभ 2025 के शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और संगम तट पर साधु-संतों का जमावड़ा पहले से ही लग चुका है। इस वर्ष महाकुंभ में एक साधु हैं, जिनकी साधना और संकल्प उन्हें श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहे हैं। ये साधु हैं गीतानंद गिरी महाराज, जो 45 किलो रुद्राक्ष धारण करने के कारण आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
Mahakumbh 2025 : सवा दो लाख रुद्राक्ष धारण करने का अनूठा संकल्प-
गीतानंद गिरी महाराज ने 2019 में प्रयागराज के कुंभ मेला के दौरान एक अनोखा संकल्प लिया था। उन्होंने प्रतिदिन सवा लाख रुद्राक्ष धारण करने का संकल्प किया था। इस संकल्प को आज पूरे छह साल हो चुके हैं और अब उनकी रुद्राक्ष की संख्या सवा दो लाख को पार कर चुकी है। यह रुद्राक्ष का वजन 45 किलो से अधिक है, जो उन्हें एक अद्भुत रूप में प्रस्तुत करता है।
Mahakumbh 2025 : 12 घंटे रुद्राक्ष धारण करते हैं महाराज-
गीतानंद गिरी महाराज का कहना है कि वे 24 घंटे रुद्राक्ष धारण नहीं करते, बल्कि दिन में केवल सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक रुद्राक्ष पहनते हैं। इस दौरान वे केवल हल्का भोजन ग्रहण करते हैं और पूरी तरह से तपस्या में लीन रहते हैं। उनका यह विशेष संकल्प और साधना उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाता है।
Mahakumbh 2025 : व्यक्तिगत जीवन के अनसुने पहलू-
गीतानंद गिरी महाराज ने अपने जीवन के कुछ दिलचस्प पहलुओं को साझा किया। वे एक ब्राह्मण परिवार से हैं और उनके पिता भारतीय रेलवे में टीटी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता संतान प्राप्ति के लिए कई वर्षों तक संघर्ष कर रहे थे, और उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें गुरुजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी संतान को गुरुजी को समर्पित कर दिया। महाराज ने यह भी बताया कि वे पंजाब में गुरुजी के पास बड़े हुए और तब से ही उन्होंने गुरु सेवा और संन्यासी जीवन जीना शुरू कर दिया। वे संस्कृत माध्यम से हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
Mahakumbh 2025 : श्रद्धालुओं का आकर्षण-
गीतानंद गिरी महाराज का यह संकल्प और उनके जीवन के अनसुने पहलू उन्हें महाकुंभ 2025 में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं। उनकी साधना, समर्पण और तपस्या महाकुंभ की आध्यात्मिकता को और गहराई प्रदान कर रही है। उनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं और वे महाकुंभ में एक प्रतीक के रूप में स्थापित हो गए हैं।

