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चेन्नई सागर तट पर कछुओं की मौत का संकट: मछली पकड़ने के जाल से 1,000 से ज्यादा कछुए मरे, पर्यावरणीय खतरा बढ़ा
- Rohit banchhor
- 27 Jan, 2025
जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को बड़ा नुकसान हो रहा है।
Chennai News : चेन्नई। भारत के पूर्वी तट पर स्थित चेन्नई सागर तट पर एक गंभीर पर्यावरण संकट का सामना किया जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में समुद्री कछुओं की लाशें पाई जा रही हैं, जिनमें अब तक लगभग 1,000 कछुए मरे हैं। यह घटनाएं पर्यावरणविदों और अधिकारियों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कछुओं की अधिकतर मौत मछली पकड़ने के जाल में फंसने के कारण हो रही है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को बड़ा नुकसान हो रहा है।
Chennai News : अंडे देने वाली मादाएं भी इस संकट का शिकार-
हाल ही में चेन्नई के सागर तटों पर 50 ऑलिव रिडले कछुओं के शव मिले, जिनमें से कई मादा कछुए थीं जिनके शरीर में सैकड़ों अंडे मौजूद थे। यह कछुओं के प्रजनन का मौसम था, और इस त्रासदी ने और भी गंभीरता से प्रदूषण और जैव विविधता की रक्षा के लिए कार्य करने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। बेजेंट नगर और नीलंकराई के बीच 31 कछुए मरे हुए पाए गए, जो हाल ही में मरे प्रतीत हो रहे थे।

Chennai News : कछुएं की घटती संख्या पर चिंता, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा-
स्टूडेंट्स सी टर्टल कंजर्वेशन नेटवर्क और ट्री फाउंडेशन के अनुसार, मरीना बीच से लेकर नीलंकराई तक 360 कछुओं की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, पुलिकट और तिरुवोट्टियूर समुद्र तटों से भी कछुओं की मौत की खबरें आई हैं। यह घटती संख्या समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है, और यह जैव विविधता के अस्तित्व के लिए भी चिंताजनक है।
Chennai News : मछुआरों की दुविधा और तकनीकी बदलाव की आवश्यकता-
मछुआरे भी इस स्थिति में फंसे हुए हैं। बढ़ती लागत और कठिन परिस्थितियों के कारण मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मजबूर हैं, जिससे कछुओं की जान को खतरा हो रहा है। चेन्नई के मछुआरे एमई रघुपति का कहना है, "हम कछुओं को सम्मान देते हैं, लेकिन हमें अपने परिवार का पेट पालने के लिए मछली पकड़नी होती है।" विशेषज्ञों का मानना है कि मछली पकड़ने की तकनीकों को अपडेट करने की जरूरत है। मछुआरे के. भारती का सुझाव है कि कृत्रिम कोरल रीफ बनाए जाएं, जो कछुओं और मछुआरों दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

Chennai News : कागजों तक सीमित सुरक्षा उपाय-
2016 में, सरकार ने कछुओं के प्रजनन के दौरान मछली पकड़ने को तट से 5 नॉटिकल माइल दूर करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही "टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस" लगाने की योजना भी बनाई गई थी। हालांकि, ये कदम कागजों तक ही सीमित रहे हैं और जमीनी स्तर पर इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
Chennai News : नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की चेतावनी और भविष्य के उपाय-
भारत के नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने चेतावनी दी है कि अगर मछली पकड़ने के पुराने तरीकों को नहीं बदला गया, तो कछुओं के प्रजनन के दौरान मछली पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मछुआरों और कछुओं के हितों में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि इस संकट से निपटा जा सके। टिकाऊ उपायों की अनुपस्थिति में यह संकट और भी गहरा सकता है।
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