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CGPSC पूर्व चेयरमैन IAS टामन सिंह सोनवानी का विवादों से रहा है नाता, परिवार के 5 सदस्य के सिलेक्शन के लगे थे आरोप, जानें कब कब क्या हुआ

CGPAC Scam IAS Taman Singh Sonwani

CGPAC Scam IAS Taman Singh Sonwani

रायपुर। CGPSC  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में आरोपी बनाए गए सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। सोनवानी पर चयन के एवज में अभ्यर्थियों से 45 लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। 


CGPAC Scam IAS Taman Singh Sonwani : विवादों से रहा है पुराना नाता-
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के विवादों में आने से पहले टॉमन सिंह सोनवानी अपनी आईएएस की सेवा मनरेगा मामले में देशभर में सुर्खियां बटोरी थी। इस मामले की भी जांच सीबीआई कर रही है। सोनवानी के भ्रष्‍टाचार से जुड़ा एक बेहद चर्चित मामला है। यह मामला 2014 से 2015 के बीच का है। तब सोनवानी जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी थे। इस दौरान ओपी चौधरी तब वहां के कलेक्‍टर थे। इसी दौरान ओपी चौधरी  की शादी तय हो गई और वे 10 दिन की छुट्टी पर चले गए। सोनवानी जिले के वरिष्‍ठ अफसर थे, इसलिए नियमानुसार कलेक्‍टर का प्रभार उन्‍हें सौंपा गया। 

कलेक्टर ओपी चौधरी के छुट्टी पर जाते ही टामन सिंह सोनवानी ने मनरेगा और 13वें वित्त आयोग के तहत ताबड़तोड़ स्वीकृति देनी प्रारंभ कर दी। 13वें वित्त आयोग के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2014-15 के लिए जांजगीर जिले के लिए 109 लाख रुपए स्वीकृत किया गया था। मगर सोनवानी ने 19 जून 2014 और 20 जून 2014 याने दो दिन में ही़ 199 लाख रुपए के काम को स्वीकृत कर दिया। याने स्वीकृति से 90 लाख ज्यादा के काम। बाद में इस मामले की जांच हुई मगर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी।



CGPAC Scam IAS Taman Singh Sonwani : भर्ती घोटाला में कब कब क्या हुआ-
सीबीआई ने 2022 में आयोजित लोक सेवा आयोग परीक्षा में भाई-भतीजावाद के आरोपों के सिलसिले में छत्तीसगढ़ में 15 स्थानों पर छापेमारी की थी। जिसमें सीबीआई को राजनेताओं, पीएससी अधिकारियों और लोक सेवकों के 'अयोग्य' परिवार के सदस्यों को आकर्षक सरकारी नौकरियों में भर्ती कराने की जानकारी मिली थी। इसके बाद रायपुर में छह, दुर्ग में तीन, महासमुंद और धमतरी में दो-दो तथा सरगुजा और बिलासपुर में एक-एक जगह छापेमारी की गई, जो भाई-भतीजावाद से लाभान्वित होने वाले लोगों से जुड़े थे। सीबीआई ने 16 ऐसे उम्मीदवारों के नाम बताए, जिन्हें डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक और अन्य आकर्षक पदों पर नियुक्त किया गया था।


CGPAC Scam IAS Taman Singh Sonwani : 15 उम्मीदवारों के परिसरों की ली गई थी तलाशी-
इस दौरान 15 उम्मीदवारों के परिसरों की तलाशी ली, जबकि एक उम्मीदवार के आवास की तलाशी पहले ली गई थी। जिसके बाद सीबीआई ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और एक परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ जुलाई में अपने बेटे, बेटियों, रिश्तेदारों और परिचितों को मेरिट सूची में उच्च अंक दिलाने में मदद करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।


CGPSC Recruitment Scam : सोनवानी के परिवार के 5 सदस्य हुए लाभान्वित-
सीबीआई के बताए अनुसार भर्ती प्रक्रिया में सोनवानी के परिवार के पांच सदस्य लाभान्वित हुए। इनमें उनके बेटे नितेश और बहू निशा कोसले (डिप्टी कलेक्टर), बड़े भाई का बेटा साहिल (डिप्टी एसपी), बहू दीपा आदिल (जिला आबकारी अधिकारी) और बहन की बेटी सुनीता जोशी (श्रम अधिकारी) शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन सचिव (ध्रुव) ने अपने बेटे सुमित को डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित कराया था। 


CGPSC Recruitment Scam : हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला-
छत्‍तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा में अफसरों और नेताओं के रिश्‍तेदारों की नियुक्ति के आरोपों के बीच मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। जांच एजेंसी ने कोर्ट को 18 नामों की एक सूची सौंपी गई थी, जिनका सलेक्शन हुआ है। इनमें पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के बेटा- बहू व अन्‍य रिश्‍तेदारों के साथ ही कुछ अफसरों और नेताओं के रिश्‍तेदारों के नाम शामिल थे। बता दें कि चयनित लिस्‍ट 6 सितंबर को जारी हुई थी ठीक इसके दो दिन बाद चेयरमैन सोनवानी भी पीएससी से रिटायर हो गए।

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