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CG News: रविवार को ऑनलाइन प्रशिक्षण के आदेश का शिक्षकों ने किया विरोध, शनिवार को कराने की मांग

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CG News: महासमुंद: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) महासमुंद ने नई पाठ्यपुस्तकों के अध्यापन के लिए शिक्षकों का ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी किया है। प्राचार्य द्वारा जारी आदेश के अनुसार 5 जुलाई 2026 से 6 सितंबर 2026 तक लगातार 10 रविवार को हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और गणित विषयों का ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।


शिक्षकों ने उठाया साप्ताहिक अवकाश का मुद्दा

इस आदेश का संकुल शैक्षिक समन्वयक संघ, ब्लॉक इकाई बागबाहरा ने विरोध किया है। संघ का कहना है कि रविवार कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश होता है और यह उनका अधिकार भी है। लगातार 10 रविवार को प्रशिक्षण रखने से शिक्षकों की छुट्टी प्रभावित होगी।


परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों का दिया हवाला

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षक पूरे सप्ताह विद्यालय में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। रविवार का दिन उन्हें परिवार और सामाजिक कार्यों के लिए मिलता है। ऐसे में अवकाश के दिन प्रशिक्षण आयोजित करना उचित नहीं है और इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।


शनिवार को प्रशिक्षण कराने की मांग

संघ ने प्रशासन से मांग की है कि रविवार की जगह शनिवार को ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि इससे विभागीय कार्य भी प्रभावित नहीं होंगे और शिक्षक अपने पारिवारिक व सामाजिक दायित्व भी आसानी से निभा सकेंगे।


संघ ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील

ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र चंद्राकर सहित संघ के कई पदाधिकारियों और संकुल समन्वयकों ने प्राचार्य डाइट महासमुंद से रविवार के प्रशिक्षण आदेश को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सुविधा और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का समय बदला जाना चाहिए। संघ के ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र चन्द्राकर परमानंद निर्मलकर, गुरुदत्त पटेल, विजय कुमार साहू, मनीष अवसरिया, गोविन्द चौधरी, मनोज चक्रधारी, देवलाल सिन्हा, मोहिंदर पांडे, विद्या प्रसाद चन्द्राकर, गेंदलाल यादव, वेदभूषण दीवान, राधे निराला, अनिल पटेल सहित समस्त संकुल समन्वयकों ने मांग की है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर रविवार के ऑनलाइन प्रशिक्षण को तत्काल निरस्त करते हुए रविवार के स्थान पर शनिवार को आयोजित किया जाये ताकि शिक्षकगण विभागीय जिम्मेदारी के साथ-साथ पारिवारिक एवम सामाजिक दायित्वों का भी निर्बाध रूप से निर्वहन कर सकें।

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