MP News : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आयुष विभाग की समीक्षा बैठक की, धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आयुर्वेद वेलनेस सेंटर खोलने की पहल, 12 केंद्रों को मिली मंजूरी
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयुष विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में आयुष मंत्री इंद्र सिंह परमार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और प्रमुख सचिव आयुष शोभित जैन समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आयुष चिकित्सा पद्धति को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
धार्मिक स्थलों पर आयुष केंद्र स्थापित करने की योजना
सीएम मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानों पर आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा व्यवस्था और वेलनेस केंद्र स्थापित करना सराहनीय कदम है। उन्होंने अन्य प्रदेशों के सफल प्रयोगों का अध्ययन कर बेहतर कार्य करने और इनकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने वृद्ध नागरिकों के लिए ‘वयोमित्र’ कार्यक्रम की सराहना की। इसी तरह ‘कारूण्य’ कार्यक्रम के तहत असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को गुणवत्तापूर्ण जीवन देने के प्रयासों को भी प्रशंसनीय बताया।
पर्यटन विभाग के साथ MoU, 12 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनेंगे
बैठक में बताया गया कि पर्यटन विभाग के साथ किए गए MoU के तहत प्रदेश में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें खजुराहो, ओंकारेश्वर, चंदेरी, चित्रकूट, पचमढ़ी, ओरछा, उज्जैन, दतिया, मंदसौर, अलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। इन केंद्रों से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटकों को आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
एलोपैथी के साथ भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि एलोपैथी के साथ-साथ भारतीय परंपरा से जुड़ी चिकित्सा पद्धतियों का प्रोत्साहन जरूरी है। प्रदेश में कई प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य कार्यरत हैं जो बड़ी संख्या में लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं। उज्जैन समेत कई स्थानों पर शल्य चिकित्सा के बिना रोगियों को लाभान्वित करने के उदाहरण मिलते हैं। उन्होंने सामान्य प्रसव कराने वाले अस्पतालों की सराहना की और आजीवन आयुर्वेद चिकित्सा लेने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन कार्यक्रम से जोड़ने के निर्देश दिए।
जिला अस्पतालों में आयुष विंग और पंचकर्म यूनिट स्थापित होंगे
स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुरूप जिला स्तरीय अस्पतालों में विकल्प के रूप में आयुष विंग स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट भी स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 22 जिलों के एलोपैथी चिकित्सालयों में आयुष विंग की स्थापना चल रही है। पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं और 12 जिलों में 50 बिस्तर क्षमता के आयुष अस्पताल शुरू किए जाएंगे।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत नए महाविद्यालयों को मंजूरी
भारत सरकार से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालयों को मंजूरी मिली है। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में 29 करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक और अकादमिक भवन का निर्माण चल रहा है। छह जिला आयुष कार्यालय बनकर तैयार हो गए हैं और 80 आयुष औषधालयों में से 53 का निर्माण पूरा हो चुका है।
आयुष चिकित्सा को नई दिशा, 75 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि एलोपैथी के साथ-साथ आयुष को बढ़ावा देना जरूरी है। वित्त वर्ष 2026-27 में सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को फर्स्ट रेफरल यूनिट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इनमें हॉस्टल निर्माण, सीट क्षमता बढ़ाने, यूनानी पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध कराने और शोध कार्य बढ़ाने की योजना है। बालाघाट में आयुष शोध केंद्र शुरू किया जाएगा। श्रम विभाग से समन्वय कर 13 लाख ESIC पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा की कैशलेस सुविधा दी जाएगी। स्वास्थ्य बीमा में आयुष को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन कार्यों के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार
बैठक में बताया गया कि सुप्रजा, आयुर्विद्या, वयोमित्र, मस्कुलर-स्केलेटल प्रिवेंटिव और कारूण्य कार्यक्रमों के तहत नागरिकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। जनजातीय बहुल और सिकल सेल एनीमिया प्रभावित जिलों में आयुर्वेदिक औषधियों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इन कार्यक्रमों की गति बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

