Raghav Chadha: राजनीतिक फैसलों की आलोचना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं: राघव चड्ढा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
Raghav Chadha: नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की, जिसमें सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित मानहानिकारक और एआई-जनरेटेड सामग्री को हटाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि किसी राजनीतिक फैसले की आलोचना को प्रथम दृष्टया व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक निर्णयों की आलोचना सामान्य बात है। अगर किसी सामग्री से मानहानि होती है, तो उसके लिए अलग से मानहानि का मुकदमा दायर किया जा सकता है।
आरके लक्ष्मण के कार्टून का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान अदालत ने मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण (R. K. Laxman) का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के समय से ही राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा रहे हैं। अदालत ने कहा कि पहले सोशल मीडिया नहीं था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण ऐसी सामग्री तेजी से फैलती है।
एआई वीडियो और डीपफेक पर क्या बोला कोर्ट?
राघव चड्ढा की याचिका में सोशल मीडिया पर वायरल एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, एडिटेड क्लिप और फर्जी भाषणों को हटाने की मांग की गई थी। इस पर अदालत ने कहा कि यदि किसी खास वीडियो या पोस्ट पर आपत्ति है, तो उसके खिलाफ अलग याचिका दाखिल की जा सकती है। हालांकि, सभी प्रकार की सामग्री पर व्यापक रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
अप्रैल में बीजेपी में हुए थे शामिल
गौरतलब है कि 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली थी। उनके साथ पार्टी के कई अन्य राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में शामिल हुए थे, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहा।

