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मोतीलाल नेहरू मार्ग वाले सरकारी आवास में ही रहेंगी दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर, जानें पूर्व पीएम के परिवार को क्या क्या मिलती है सरकारी सुविधाएं

डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर, पत्नी गुरुशरण कौर और परिवार के साथ श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोग।

नई दिल्ली: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को नई दिल्ली के निगम बोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी गुरशरण कौर और बेटियां मौजूद थीं। देश ने एक महान अर्थशास्त्री, दूरदर्शी नेता और सादगी के प्रतीक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


गुरुशरण कौर को ज़ेड प्लस सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं

डॉ. सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी गुरशरण कौर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की ज़ेड प्लस सुरक्षा दी गई है। इसके तहत उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन और आवास पर 50 सुरक्षाकर्मी उपलब्ध रहेंगे। तीन मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित सरकारी आवास, जहां वे अपने पति के साथ रह रही थीं, अब भी उनके पास रहेगा। यह आवास उन्हें आजीवन उपलब्ध रहेगा या जब तक वे इसे स्वेच्छा से नहीं छोड़ देतीं। इसके अतिरिक्त, गुरशरण कौर को कैबिनेट मंत्री के बराबर की सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। इनमें मुफ्त चिकित्सा सेवाएं, बिजली-पानी, रियायती हवाई और रेल यात्रा, और निजी सहायक की सेवाएं शामिल हैं।


डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक और आर्थिक योगदान

डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे देश के पहले सिख प्रधानमंत्री थे और इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले चौथे नेता बने। उनके कार्यकाल में भारत ने आर्थिक सुधारों और विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने 1991 के आर्थिक उदारीकरण का नेतृत्व किया, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाया। पद छोड़ने के बाद, डॉ. सिंह को तीन मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित बंगला आवंटित किया गया था, जहां वे अपने अंतिम समय तक रहे। यह बंगला पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का आधिकारिक आवास था।


एसपीजी सुरक्षा का इतिहास और विवाद

2019 में डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई थी और उन्हें सीआरपीएफ की ज़ेड प्लस सुरक्षा दी गई। केंद्र सरकार ने सुरक्षा श्रेणी में बदलाव को खतरे के आकलन पर आधारित बताया। विपक्ष ने इसे राजनीतिक उद्देश्य से लिया गया कदम करार दिया था। विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) की स्थापना 1985 में की गई थी। 2019 के संशोधन के बाद, यह सुरक्षा केवल वर्तमान प्रधानमंत्री और उनके परिवार तक सीमित कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्रियों को यह सुरक्षा अब केवल पांच साल तक मिलती है।


डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत

डॉ. सिंह को सादगी, सेवा और निष्ठा के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक मोर्चे पर वैश्विक पहचान बनाई। उनके योगदान और व्यक्तित्व ने भारतीय राजनीति में ईमानदारी और सादगी का मानदंड स्थापित किया। देश ने उनके निधन के साथ एक ऐसा नेता खो दिया है, जिसने अपने कार्यों से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।

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