जिलाध्यक्ष के लिए आड़े आ रहा'उम्र का बंधन, भाजपा नेताओं की बढ़ रही टेंशन...
MP News : भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा संगठन ने अब अपने 60 जिलों में अध्यक्षों के निर्वाचन की कवायद तेज कर दी है। पार्टी हाईकमान पहले ही जिलाध्यक्षों के लिए 60 साल का क्राइटेरिया तय कर चुका है। इसके अलावा बड़े जिलों में अध्यक्षों के लिए कशमकश बढ़ गई है, क्योंकि कई दावेदार ऐसे भी हैं जो इस क्राइटेरिया के चलते पात्रता की श्रेणी से बाहर हो रहे हैं। पुराने जिलाध्यक्ष अपने पुनर्वास को लेकर सशंकित हैं। भाजपा संगठन ने 1 से 15 दिसंबर तक मंडल अध्यक्षों के निर्वाचन का समय था।
MP News : पार्टी सूत्रों का कहना है कि सोमवार तक करीब 50 जिलों में अध्यक्षों का निर्वाचन हो चुका है। सभी जिलों की सूची अपडेट की जा रही है। निर्वाचन के अंतिम दौर में कई जिलों में कई मंडल अध्यक्षों को पुनः मौका दे दिया गया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे जिलों के मौजूदा अध्यक्षों के नई भूमिका को लेकर भी मंथन चल रहा है। नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के पुराने नेताओं ने बताया कि संगठन और प्रभारियों ने पहले तो 'गोबर गणेश और बड़े नेताओं के गोद में बैठे' जैसे जुमले देकर ऐसे लोगों को अध्यक्ष न बनाने की पॉलिसी तय की थी लेकिन अंतिम क्षणों में क्राइटेरिया शिथिल हो गया। कई जगह पुराने चेहरे आ गए और सांसद- विधायकों की भी चल गई।
MP News : सुमित ही संभालेंगे कमान-
भोपाल में जिले की कमान मौजूदा अध्यक्ष सुमित पचौरी को पुनः सौंपी जा सकती है। पचौरी के परफार्मेस से सत्ता-संगठन के नेता और स्थानीय सांसद-विधायक भी संतुष्ट बताए जाते हैं। बदलाव की स्थिति में पूर्व अध्यक्ष विकास वीरानी और उमाकांत दीक्षित दावेदार हो सकते हैं। महिला अध्यक्ष के नवाचार की स्थिति में वंदना जाचक का नाम लिया जा रहा है।

