CG News : गढ़बेंगाल घोटुल में संस्कृति का उत्सव, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- आधुनिक घोटुल नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ेगा
- Rohit banchhor
- 30 Jan, 2026
ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।
CG News : रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान गढ़बेंगाल स्थित आधुनिक घोटुल का दौरा कर बस्तर की समृद्ध आदिवासी परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। मांदर की थाप, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन करते हुए कहा कि घोटुल प्राचीन काल से आदिवासी समाज का शैक्षणिक और संस्कार केंद्र रहा है। चेंदरू पार्क के समीप निर्मित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली, सामाजिक व्यवस्था और परंपराओं से परिचित कराएगा। उन्होंने इसे बस्तर की गौरवशाली विरासत को सहेजने का सशक्त प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने घोटुल परिसर में युवाओं और युवतियों के लिए बनाए गए लेय्योर और लेयोस्क कुरमा कक्षों, साथ ही बिडार कुरमा में पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक सामग्रियों के संग्रह का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के आग्रह पर उन्होंने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा, जिसमें गाटो-भात, कोदो-भात, रागी से बने व्यंजन, विभिन्न भाजी, पेज और चटनी शामिल रहे।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, पद्मश्री पंडीराम मंडावी, लोक कलाकार बुटलू राम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने बस्तर की विभूतियों पद्मश्री हेमचंद मांझी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी और लोक कलाकार बुटलू राम से आत्मीय मुलाकात कर उनका सम्मान किया। साथ ही टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिवारजनों से भी भेंट की।
वन विभाग और पद्मश्री पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल लकड़ी, मिट्टी और बांस से बना पूर्णतः इको-फ्रेंडली ढांचा है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक जुड़ाव और विरासत संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

