Magh Mela Shankaracharya controversy: शंकराचार्य को मनाने में जुटे लखनऊ के उच्चाधिकारी, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रखी ये शर्तें
Magh Mela Shankaracharya controversy: प्रयागराज: प्रयागराज के चल रहे माघ मेले में ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को संगम स्नान के लिए जा रही उनकी पालकी को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया, जिससे तनावपूर्ण माहौल बन गया।
Magh Mela Shankaracharya controversy: शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई, जिसमें संन्यासियों, बटुकों, ब्राह्मणों और साधु-संतों पर मारपीट का आरोप लगा। घटना के बाद शंकराचार्य ने त्रिवेणी मार्ग पर बद्रिकाश्रम शिविर के सामने 11 दिनों तक (18 से 27 जनवरी) धरना दिया, लेकिन कोई अधिकारी माफी के लिए नहीं पहुंचा। 28 जनवरी को वे बिना स्नान किए भारी मन से वाराणसी लौट गए।
Magh Mela Shankaracharya controversy: मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर 'शंकराचार्य' उपाधि साबित करने को कहा और भूमि आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी, जिस पर राजनीतिक बवाल मचा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत विपक्ष ने सरकार की आलोचना की।
Magh Mela Shankaracharya controversy: अब माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) पर स्नान के लिए लखनऊ के उच्चाधिकारी शंकराचार्य को मनाने में जुटे हैं। शंकराचार्य ने स्नान की शर्तें रखी हैं- मौनी अमावस्या पर अभद्रता के लिए लिखित माफी, दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर व कार्रवाई, गाय को राष्ट्रमाता घोषित करना और चारों शंकराचार्यों के लिए स्थाई स्नान प्रोटोकॉल। उनके राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार ने इनकी पुष्टि की। कुछ रिपोर्ट्स में प्रशासन माफी को तैयार बताया गया है, जबकि अन्य में इनकार। विवाद से धार्मिक आस्था और प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल उठे हैं।

