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Delhi Capitals : WPL को मिलेगी ‘हिजाब’ वाली पहली खिलाड़ी? जानें 15 साल की नाज की कहानी

WPL 2026

WPL 2026 : नई दिल्ली। वुमेंस प्रीमियर लीग (WPL) ने भारतीय महिला क्रिकेट को नया मुकाम दिया है। इस लीग ने कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का अवसर प्रदान किया है। इसी कड़ी में अब 15 साल की नाज की कहानी चर्चा में है, जिन्होंने हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलने का साहसिक कदम उठाया है और अपने सपनों को नई उड़ान देने की तैयारी की है।


WPL 2026 : सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नाज़ का वीडियो

दिल्ली कैपिटल्स ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर नाज का एक प्रेरक वीडियो शेयर किया है। इसमें देखा जा सकता है कि नाज नेट्स में गेंदबाजी कर रही हैं और उनके आत्मविश्वास ने सभी का दिल जीत लिया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्रिकेट प्रेमी उनकी तारीफ कर रहे हैं।


WPL 2026 : नाज कौन हैं?

नाज महज 15 साल की हैं और उनका ताल्लुक चेन्नई, तमिलनाडु से है। वर्तमान में वह यूनाइटेड किंग्डम में रहती हैं और वहीं से क्रिकेट प्रशिक्षण ले रही हैं। वह जिस क्रिकेट एकेडमी से ट्रेनिंग ले रही हैं, उसकी दिल्ली कैपिटल्स फ्रेंचाइजी के साथ साझेदारी है। इसी वजह से उन्हें WPL टीम के नेट बॉलर के तौर पर काम करने का अवसर मिला है।


WPL 2026 : प्रेरणा का स्रोत: शेफाली वर्मा

नाज ने वीडियो में कहा कि टीम इंडिया की विस्फोटक ओपनर शेफाली वर्मा उनकी प्रेरणा हैं। शेफाली की निडर बल्लेबाजी और आत्मविश्वास ने नाज को क्रिकेट के प्रति जुनून और समर्पण का पाठ पढ़ाया है। उनका सपना है कि वह भी WPL में दिल्ली कैपिटल्स की जर्सी पहनकर मैदान में उतरें।


WPL की पहली हिजाबी खिलाड़ी बनने का सपना

अगर नाज अपने सपनों को साकार करती हैं, तो वह वुमेंस प्रीमियर लीग की पहली हिजाबी खिलाड़ी बन जाएंगी। यह उनके लिए ही नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के इतिहास में भी एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक पल होगा।


WPL 2026 : हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलने की मिसाल

इस दिशा में स्कॉटलैंड की अबताहा मकसूद का उदाहरण सामने आता है। जुलाई 2021 में उन्होंने इंग्लैंड की चर्चित क्रिकेट लीग ‘द हंड्रेड’ में बर्मिंघम फीनिक्स टीम के लिए हिजाब पहनकर खेला था। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं।


WPL 2026 : नाज की कहानी का संदेश

नाज ने कम उम्र में ही यह साबित कर दिया है कि जुनून, मेहनत और सही अवसर मिल जाए, तो कोई भी लड़की अपने सपनों को साकार कर सकती है। उनकी यह कहानी युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

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