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Ratan Tata's will: रतन टाटा की 10000 करोड़ की वसीयत में डॉगी टीटो को मिला इतना हिस्सा, शांतनु और रसोईए के भी नाम, लेकिन भाई नावेल टाटा का जिक्र तक नहीं, जाने क्यों!

रतन टाटा ने अपनी संपत्ति परिवार, चैरिटी, और वफादार साथियों के बीच बांटते हुए वसीयत छोड़ी।

Ratan Tata's will

Ratan Tata's will: नई दिल्ली: देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने अपनी संपत्ति को अपने परिवार, चैरिटी, और वफादार साथियों के बीच बांटते हुए एक अनुकरणीय वसीयत छोड़ी है। रतन टाटा ने अपनी संपत्ति अपने फाउंडेशन, भाई जिम्मी टाटा, सौतेली बहनों शिरीन और डिएना जीजीभॉय, वफादार घर के स्टाफ और अन्य को सौंपी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रतन टाटा ने 10,000 करोड़ से अधिक की वसीयत में अपने परिवार, पालतू कुत्ते टीटो, मित्र शांतनु नायडू और चैरिटी का भी उल्लेख किया है।

Ratan Tata's will: रतन टाटा की वसीयत में उनके भाई जिम्मी, सौतेली बहनें शिरीन और डिएना, और दशकों से उनके साथ रहे बटलर सुब्बैया और सहायक शांतनु नायडू को शामिल किया गया है। टाटा संस में उनकी 0.83 फीसदी हिस्सेदारी रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन को सौंपी जाएगी, जो चैरिटेबल कार्यों में समर्पित रहेगी। संपत्तियों में अलीबाग का बीच बंगला, मुंबई के जुहू तारा रोड स्थित आवास और 350 करोड़ से अधिक की एफडी भी शामिल है।



Ratan Tata's will: रतन टाटा ने अपने पालतू कुत्ते टीटो का भी ध्यान रखा है। जर्मन शेफर्ड टीटो को उन्होंने छह साल पहले गोद लिया था, और उसकी देखभाल अब दशकों से उनके कुक राजन शॉ करेंगे। उनके वफादार मित्र और सहायक शांतनु नायडू के साथ भी उनकी वसीयत में विशेष ध्यान रखा गया है। टाटा ने ‘गुडफेलोज़’ नामक शांतनु के स्टार्टअप में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी है और उनकी शिक्षा के लिए लिया गया पर्सनल लोन माफ कर दिया है।




Ratan Tata's will: शांतनु और रतन टाटा की दोस्ती 2014 में तब शुरू हुई थी जब शांतनु ने आवारा कुत्तों के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर डिजाइन किया था। इस पहल से प्रभावित होकर टाटा ने उन्हें अपने साथ काम करने का अवसर दिया और समय-समय पर हर संभव सहयोग प्रदान किया। रतन टाटा की यह वसीयत उनकी उदारता और वफादारी का प्रतीक है।




Ratan Tata's will: भाई नोएल टाटा का जिक्र तक नहीं 
रिपोर्ट के मुताबिक, रतन टाटा और नोएल टाटा के बीच संबंधों में जटिलताएँ थीं। हालांकि वे सगे भाई नहीं थे, लेकिन समय के साथ उनके रिश्ते मजबूत होते गए। रतन टाटा को शुरुआती दौर में नोएल के अनुभव पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने टाटा ग्रुप में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी। बावजूद इसके, दोनों एक-दूसरे के साथ काम करने लगे और धीरे-धीरे नोएल टाटा रतन टाटा के करीबी सहयोगियों में से एक बन गए।

Ratan Tata's will: जब रतन टाटा से उनके उत्तराधिकारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि टाटा ट्रस्ट उनके बाद इस जिम्मेदारी को संभालेगा। हालांकि, उनके पास स्वयं उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार था। कुछ वर्ष पहले, नोएल टाटा को ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। रतन टाटा के नहीं रहने पर नोएल को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया।




बिजनेस टाइकून रतन टाटा 
Ratan Tata's will: बता दें देश के सबसे बड़े बिजनेस टाइकून रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था। वहीं 9 अक्टूबर 2024 को रतन टाटा का हाल ही में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया, जहां उन्हें नियमित जांच के लिए भर्ती कराया गया था।


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