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मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर कार्यक्रम संपन्न

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यही कारण है कि, आज हमारा देश शिक्षित और स्वावलंबी देश में गिना जा रहा है।

MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में आज राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यूथ दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा नाटक, डांस और विभिन्न प्रकार की कलाओं का प्रदर्शन किया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शैलेंद्र यादव, कैप्टन, एम.पी. व्हीलचेयर क्रिकेट टीम एवं राष्ट्रीय स्तर के पैरा तैराक उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. संजय तिवारी द्वारा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य "देश का हर युवा अपनी स्वयं की प्रतिभा अपनी ताकत को पहचान कर अपने आप को स्वावलंबी बनाएं एवं जीवन के हर पायदान पर एक नई परिभाषा स्थापित करें"था।


MP News : कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन विश्वविद्यालय की इनक्यूबेशन प्रभारी डॉ. प्रज्ञा ओझा द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शैलेंद्र यादव ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, मैं 6 साल की उम्र से पोलियो से ग्रसित हूं। जिसके चलते मैंने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखें एवं झेले हैं और आज मैंने अपनी मेहनत के दम पर ही यह मुकाम हासिल किया है। मैं आज व्हीलचेयर पर बैठकर भी भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के लिए खेल रहा हूं। मैं यहां उपस्थित हर युवा से यही कहूंगा कि, स्वावलंबी बने और अपने जीवन में एक मुकाम हासिल करें। हमारी कड़ी मेहनत ही हमारे परिवार का और हमारा नाम ऊंचाई तक लेकर जाएगी।


MP News : दिव्यांता हमारी कमजोरी है, लेकिन अक्षमता नहीं। आज आधुनिक युग में हर समस्या का समाधान है और इसीलिए हम दिव्यांग होकर भी समाज में अपना स्थान, अपनी मेहनत की दम पर हासिल कर सकते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. संजय तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि, राष्ट्रीय युथ दिवस को हम स्वामी विवेकानंद जयंती दिवस के रूप में भी जानते हैं। स्वामी विवेकानंद ने अपनी युवावस्था में अनेकों सभाएं की जिसमें उन्होंने हर युवा वर्ग को स्वतंत्र और स्वावलंबी होने की शिक्षा प्रदान करी।


MP News : डॉ. तिवारी ने कहा कि, आज के समय में जगह-जगह दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षा का प्रावधान है। हमें गंभीरता से इस बात को समझना होगा कि, आज के युग में कोई भी बच्चा या युवा अपने परिवार पर बोझ नहीं है। दिव्यांग युवा अपनी क्षमता अनुसार रोजगार की खोज करके अपना जीवन यापन एवं अपने परिवार का भरण पोषण करने में सक्षम है। यह बहुत ही गर्व का विषय है कि, कौशल विकास के माध्यम से आज देश के अनेक युवा लाभान्वित हुए हैं। यही कारण है कि, आज हमारा देश शिक्षित और स्वावलंबी देश में गिना जा रहा है।

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