NASA's Artemis-2 Mission Launched: नासा का आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च, 54 साल बाद चांद के सफर पर रवाना 4 अंतरिक्ष यात्री, ये है मिशन का लक्ष्य
NASA's Artemis-2 Mission Launched: वाशिंगटन डीसी/मुंबई: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आज अपने आर्टेमिस-2 मिशन को लॉन्च कर दिया है। इसकी लॉन्चिंग सफलत रही। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर रवाना हुए। 54 साल बाद यह पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है, अपोलो के बाद ये पहला मानव मिशन है। इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एसएलएस (SLS) रॉकेट ने 'इंटीग्रिटी' नाम के ओरियन कैप्सूल को लॉन्च किया गया। भारतीय समय के अनुसार लॉन्चिंग गुरुवार सुबह 4:05 बजे की गई। इस मौके पर प्रेसिडेंट ट्रम्प ने नासा के आर्टेमिस 2 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर नासा की टीम और अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई दी है।
मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री है, टीम के कैप्टन रीड वाइसमैन हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। रॉकेट ने लॉन्चिंग के एक घंटे बाद कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा दिया। अब अगले 25 घंटे ये चारो अंतरिक्ष यात्री सभी सिस्टम की जांच करेंगे, जिसके बाद चांद की ओर रवाना हो जाएंगे।
अंतरिक्ष से आया पहला संदेश
पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने के बाद अंतरिक्ष से पहला संदेश आया, इस मैसेज में कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया कि 'इंटीग्रिटी' पर सूर्योदय हो रहा है। इसी बीच मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच ने अंतरिक्ष यान के टॉयलेट के मरम्मत का काम शुरू कर दिया ताकि अगले 10 दिन कोई समस्या न हो और यात्रा आरामदायक रहे।
क्या है इस मिशन का लक्ष्य
इस 10 दिन की यात्रा में अंतरिक्ष यात्री 10 लाख किमी सिर्फ आना और जाना में सफर करेंगे। अंतरिक्ष यात्री चांद के पास जाएंगे मगर वहां लैंड होने के बजाय परिक्रमा करके सुरक्षित पृथ्वी पर लौट जाएंगे। इस दौरान वैज्ञानिक 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' टेक्नोलॉजी से मनुष्य के शरीर पर पड़ने वाले असर की स्टडी करेंगे। वैज्ञानिक देखें गए की डीप स्पेस में रेडिएशन से डीएनए (DNA) को कितना नुकसान होता है। बता दें यह मिशन लॉन्चिंग पहले कई बार टाल दी गई थी। फरवरी और मार्च में टेक्निकल प्रॉब्लम और फ्यूल की जांच के कारण यह समय पर लॉन्च नहीं नहीं किया जा सका था।

