Lunar Eclipse: साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू, जानें कहां-कहां दिखेगा ग्रहण और कब होगा चंद्रोदय
Lunar Eclipse: नई दिल्ली: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर आरंभ हुआ और यह शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चलेगा। लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक चलने वाला यह खगोलीय घटनाक्रम भारत में भी दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि देश में इसका सूतक काल भी मान्य माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। इस बार सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी है और ग्रहण समाप्ति तक रहेगा।
Lunar Eclipse: चंद्रोदय का समय और कहां दिखेगा ग्रहण
पंचांग के अनुसार भारत में आज चंद्रोदय शाम करीब 6 बजकर 20 मिनट पर होगा। ऐसे में कई शहरों में ग्रहण का दृश्य चंद्रोदय के समय ही देखने को मिलेगा। पूर्वोत्तर भारत में यह दृश्य सबसे पहले नजर आएगा। अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर में लोग सबसे पहले चंद्रमा की लालिमा देख सकेंगे। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, गुवाहाटी और ईटानगर सहित कई शहरों में ग्रहण स्पष्ट दिखाई देगा। यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा लाल रंग का दिखता है, जिसे आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। भारत के अलावा एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत द्वीपों और अमेरिका के कई हिस्सों में भी यह घटना देखी जा रही है।
Lunar Eclipse: सूतक काल का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल अत्यंत संवेदनशील समय माना जाता है। इस अवधि में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। यात्रा, नए कार्यों की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णयों से भी परहेज करना बेहतर माना जाता है।
Lunar Eclipse: ग्रहण के दौरान क्या करें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप और ध्यान अत्यंत फलदायी होते हैं। भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र और चंद्र मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः’ का जप करना शुभ माना गया है। अपने इष्ट देव का स्मरण और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और घर में गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। साथ ही चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र और चांदी का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
Lunar Eclipse: ग्रहण के दौरान क्या न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन करने से बचना चाहिए। भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा भी प्रचलित है। इस दौरान मंदिर की प्रतिमाओं को स्पर्श न करने और घर के मंदिर को ढककर रखने की सलाह दी जाती है। तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों को छूने से भी परहेज करने को कहा जाता है। सकारात्मक सोच और संयमित व्यवहार बनाए रखना इस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।

