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सिंधिया की सुनवाई में आए आवेदन रद्दी में फेंकने के मामले में पांच अधिकारियों पर गिरी गाज

पिछोर में केंद्रीय मंत्री के जाते ही सरकारी कर्मचारियों ने जनता के शिकायती आवेदनों को रद्दी में फेंक दिया।

सिंधिया की सुनवाई में आए आवेदन रद्दी में फेंकने के मामले में पांच अधिकारियों पर गिरी गाज
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MP News : भोपाल। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की जनसुनवाई के दौरान जनता की समस्याओं के आवेदन रद्दी में फेंकने को लेकर 5 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। बता दें कि सिंधिया ने 8 फरवरी को शिवपुरी जिला मुख्यालय के गांधी पार्क स्थित मानस भवन और पिछोर के छत्रसाल स्टेडियम में जनता दरबार लगाया था। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए की आवेदनों को सूचीबद्ध तरीके से सुरक्षित रखा जाए और आवेदकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए, लेकिन आरोप है कि पिछोर में केंद्रीय मंत्री के जाते ही सरकारी कर्मचारियों ने जनता के शिकायती आवेदनों को रद्दी में फेंक दिया।

MP News : इस मामले को न सिर्फ कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी, बल्कि केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने भी गंभीरता से लिया और इस मामले की जांच करवाई। जांच में पाया गया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया पटवारी दीपक शर्मा, दीपक दांगी, प्रतीक पाराशर और सहायक ग्रेड 3 प्रमोद वर्मा व प्रशांत शर्मा की लापरवाही सामने आई। कलेक्टर चौधरी ने प्रारंभिक रूप से दोषी पाए गए सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। कर्मचारियों द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण शिविर में अव्यवस्था की स्थिति निर्मित होना पाया गया है।

MP News : इसके अतिरिक्त पंजीयन काउंटर पर शिक्षकों की भी ड्यूटी लगाई गई थी। जिसमें ड्यूटी संतोष गुप्ता, माध्यमिक शिक्षक राम प्रकाश गुप्ता, माध्यमिक शिक्षक श्रीकांत पाराशर, प्राथमिक शिक्षक राकेश ओझा, माध्यमिक शिक्षक अनिल पाराशर शामिल हैं. इनके विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए एसडीएम द्वारा प्रस्ताव भेजा गया है।

MP News : असामाजिक तत्वों के खिलाफ एफआईआर-
पिछोर एसडीएम ने इस मामले में प्रशासनिक पक्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि पंजीयन काउंटर पर जिन कर्मचारियों द्वारा आवेदन पत्रों का पंजीयन किया जा रहा था, उनके द्वारा पंजीयन के साथ ही आवेदन की फोटो कॉपी करके एक प्रति अपने पास रिकार्ड में रखी गई थी। कुछ शरारती तत्वों द्वारा बाद में पंजीयन काउंटर पर रखे स्कैन और फोटो कॉपी आवेदन को कर्मचारियों से छीनकर जनसुनवाई में जा रही एक महिला के हाथों भेज दिए गए थे। इसके बाद यह भ्रम फैला दिया कि कर्मचारियों ने आवेदकों को कचरे में डाल दिया है।


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