काशी में मां अन्नपूर्णा के खजाने का वितरण शुरू, पांच दिनों तक दर्शन का अवसर
- Rohit banchhor
- 29 Oct, 2024
मंदिर के महंत शंकरपुरी के अनुसार, भक्त मां के खजाने से मिले सिक्कों और धान के लावा को तिजोरी और पूजा स्थल पर रखते हैं, जिससे धन और अन्न की कमी नहीं होती।
UP News : काशी। पवित्र नगरी काशी में दीपपर्व के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी खजाने का वितरण शुरू हो गया है। इस वर्ष भक्तों को विशेष रूप से पांच दिनों तक मां अन्नपूर्णा के दर्शन का अवसर प्राप्त होगा, जिसके लिए रात से ही श्रद्धालु कतार में लग गए थे। अन्नकूट तक चलने वाले इस विशेष अवसर के लिए देशभर से श्रद्धालु, खासकर दक्षिण भारत से, मां अन्नपूर्णा की कृपा और खजाने के प्रसाद की प्राप्ति की आस में काशी पहुंचे हैं। मंदिर के महंत शंकरपुरी के अनुसार, भक्त मां के खजाने से मिले सिक्कों और धान के लावा को तिजोरी और पूजा स्थल पर रखते हैं, जिससे धन और अन्न की कमी नहीं होती।
UP News : काशी में मां अन्नपूर्णा का अद्वितीय मंदिर-
काशी का यह अन्नपूर्णा मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां हर वर्ष धनतेरस से अन्नकूट तक मां के खजाने का वितरण किया जाता है। इस बार तिथि वृद्धि के कारण भक्तों को पांच दिन दर्शन का अवसर मिला है। 2022 में दीपावली के दिन सूर्यग्रहण के कारण मात्र तीन दिन ही दर्शन हुए थे, लेकिन इस वर्ष भक्तों के लिए यह पर्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
UP News : अन्नपूर्णा और काशी का विशेष संबंध-
काशी का यह प्रधान देवीपीठ देवी अन्नपूर्णा के नाम से प्रसिद्ध है। स्कन्दपुराण के ‘काशीखण्ड’ के अनुसार, भगवान शिव गृहस्थ हैं और भवानी (अन्नपूर्णा) उनकी गृहस्थी को चलाती हैं। यह मान्यता है कि कलियुग में काशी अन्नपूर्णा की पुरी होगी, और इसी कारण यहां मां अन्नपूर्णा का मंदिर प्रधान देवीपीठ के रूप में विराजमान है। ‘ब्रह्मवैवर्तपुराण’ के अनुसार, देवी अन्नपूर्णा ही अन्न की अधिष्ठात्री हैं, जो काशीवासियों के योग-क्षेम का भार वहन करती हैं।
UP News : धनतेरस और यम दीप का महत्व-
इस वर्ष पंचदिवसीय दीपपर्व का शुभारंभ धनतेरस से हुआ, जिसे यमराज और धन्वंतरि की आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यमराज से अकालमृत्यु टालने के लिए यम दीप जलाने की परंपरा है। इसके अलावा, धन्वंतरि पूजन भी इसी दिन गोधूली बेला में किया जाता है, जिसमें औषधियों का प्रसाद रूप में वितरण होता है। बाजारों में बर्तनों की दुकानें सजी हैं, और घरों में लक्ष्मी-गणेश, काली, दुर्गा आदि का पूजन कर भड़ेहर भरने की परंपरा निभाई जा रही है।
UP News : काशी में दीपपर्व और मां अन्नपूर्णा के खजाने का यह अनोखा संयोजन हर वर्ष श्रद्धालुओं को इस पावन नगरी की ओर खींचता है, जहां देवी के आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में समृद्धि और संतोष की कामना की जाती है।

