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Cyber Fraud : पुलिस की साइबर ठगों पर सख्ती, नायका फ्रेंचाइजी के लालच में 11 लाख ठगने वाले झारखंडी गिरोह का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार

Cyber Fraud

गिरफ्तार आरोपियों ने जगदलपुर के एक व्यवसायी से नायका कंपनी की फर्जी फ्रेंचाइजी का झांसा देकर 11 लाख 65 हजार रुपये हड़प लिए थे।

Cyber Fraud : जगदलपुर। जिले में साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की मुहिम तेज हो गई है। बस्तर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के 5 प्रमुख सदस्यों को झारखंड के रांची से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से ऑपरेट होता था और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों को लुभाकर लाखों रुपये की ठगी करता था। गिरफ्तार आरोपियों ने जगदलपुर के एक व्यवसायी से नायका कंपनी की फर्जी फ्रेंचाइजी का झांसा देकर 11 लाख 65 हजार रुपये हड़प लिए थे।


मामला जगदलपुर के व्यवसायी देवांश कुमार बजाज से जुड़ा है, जो नायका ब्रांड की फ्रेंचाइजी लेकर बिजनेस शुरू करने के सपने देख रहे थे। ठगों ने एक फर्जी वेबसाइट बनाकर उन्हें संपर्क किया और श्लिमिटेड ऑफरश् का लालच दिया। देवांश ने विश्वास करते हुए कुल 11,65,000 रुपये विभिन्न बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए। जब फ्रेंचाइजी का कोई संकेत न मिला, तो उन्होंने रेंज साइबर थाना जगदलपुर में शिकायत दर्ज कराई।


एसपी बस्तर शलभ सिंहा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की, जिसमें साइबर एक्सपर्ट्स शामिल थे। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी का मास्टरमाइंड बिहार के पटना का गोपाल कुमार शर्मा है, जिसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। गोपाल गिरोह का श्मनी लॉन्ड्ररश् था, जो फर्जी म्यूल अकाउंट्स (मध्यस्थ खाते) के जरिए ठगे गए पैसे को कई लेयरों में ट्रांसफर करता था।


विशेष टीम ने डिजिटल ट्रेल फॉलो करते हुए झारखंड के रांची पहुंचकर छापेमारी की। वहां से मुख्य आरोपी आयुष कुमार राय 25 वर्ष, नीतीश कुमार 28 वर्ष, रॉकी कुमार 23 वर्ष, धर्मेंद्र उर्फ धीरज 30 वर्ष और रेड रोज उर्फ गोरेलाल 32 वर्ष को धर दबोचा गया। इनके कब्जे से 15 से अधिक सिम कार्ड, 8 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप और डिजिटल वॉलेट्स से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसपी शलभ सिंहा ने बताया, यह गिरोह न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में सक्रिय था।


वे सोशल मीडिया और फर्जी ईमेल के जरिए टारगेट बनाते थे, खासकर युवा उद्यमियों को बिजनेस अवसरों का लालच देकर। गिरफ्तारियों से गिरोह का नेटवर्क टूट गया है, और हम अब अन्य संभावित शिकारों की पहचान कर रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सभी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसमें और ठगी के मामलों का खुलासा होने की उम्मीद है।

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