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महाकुंभ 2025: महाकुंभ का ऐसा शिविर जो कुंभ की जमीन से नहीं हटता कभी भी, यहां सालों से जल रही है अखंड ज्योति
- Pradeep Sharma
- 12 Jan, 2025
Maha Kumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए तैयारियां जोरों से चल रही है। महाकुंभ क्षेत्र में अखाड़ों और साधु संतों के लाखों शिविर तैयार हो रहे हैं जो कुंभ खत्म होने के बाद हट जाएंगे लेकिन
प्रयागराज। Maha Kumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए तैयारियां जोरों से चल रही है। महाकुंभ क्षेत्र में अखाड़ों और साधु संतों के लाखों शिविर तैयार हो रहे हैं जो कुंभ खत्म होने के बाद हट जाएंगे लेकिन कुंभ की जमीन पर एक ऐसा भी शिविर है जो कभी नहीं हटता हमेशा लगा रहता है।
Maha Kumbh 2025: जीहां हम बात कर रहे हैं ब्रह्मलीन संत स्वामी देवरहा बाबा का शिविर जो न कभी बनता है और न कभी उजड़ता है। शिविर के प्रभारी संत रामदास बताते हैं कि यह शिविर 17 साल पहले संत देवरहा बाबा की स्मृति में स्थापित किया गया था जो आज तक नहीं हटाया गया है। बाढ़ के समय ये जमीन जलमग्न हो जाती है तब भी इस शिविर के देवता यहां इसी जगह विराजमान रहते हैं।
Maha Kumbh 2025: 17 साल पहले 2007 में, प्रयागराज के महाकुंभ के दौरान संत देवरहा बाबा की स्मृति में विशेष शिविर स्थापित किया गया था। देवरहा बाबा, जिनका नाम आध्यात्मिक जगत में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, गंगा किनारे तपस्वी जीवन जीने वाले महान संत थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में लाखों श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और उन्हें धर्म व मानवता की सीख दी।
Maha Kumbh 2025: यह शिविर न केवल उनकी स्मृति को जीवंत रखने का माध्यम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और उपदेशों से परिचित कराने का एक प्रयास भी है। शिविर में बाबा के जीवन से जुड़े चित्र, पांडुलिपियां और आध्यात्मिक पुस्तकें रखी गई हैं। महाकुंभ 2025 के दौरान, इस शिविर को और भव्य स्वरूप देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।
Maha Kumbh 2025: देवरहा बाबा के शिविर की खास भूमिका इस महाकुंभ को और भी विशेष बनाएगी। संत के विचारों को आधुनिक युग के संदर्भ में पेश करना, उनकी स्मृतियों को सहेजना और श्रद्धालुओं को उनके उपदेशों से प्रेरित करना इस शिविर का मुख्य उद्देश्य होगा। देवरहा बाबा के अनुयायियों ने भी इस बार बड़े पैमाने पर शिविर स्थापित करने और संत के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। उनके शिविर में ध्यान, योग और भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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