CBSE की तीन-भाषा नीति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, पूर्व मंत्री ने दायर की याचिका
CBSE नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य करने के बोर्ड के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री और शिक्षाविद डॉ. फौजिया खान ने इस संबंध में याचिका दाखिल कर नीति पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि 15 मई 2026 को जारी किया गया CBSE का परिपत्र जल्दबाजी में लागू किया गया है और इससे छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ बढ़ेगा। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कई राज्यों में भाषा शिक्षकों की कमी होने के बावजूद इस नीति को अनिवार्य बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में यह व्यवस्था हिंदी को और हिंदी भाषी राज्यों में संस्कृत को अप्रत्यक्ष रूप से अनिवार्य बना सकती है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा था। वहीं CBSE का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा ढांचा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता और भारतीय भाषाओं के प्रति समझ विकसित करना है। नई व्यवस्था के तहत विदेशी भाषा चुनने वाले छात्रों को पहले दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा। CBSE ने कहा है कि नीति के क्रियान्वयन से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

