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जेपी अस्पताल में हेल्प डेस्क को मरम्मत की जरूरत, ना कर्मचारी न वार्डबॉय, मरीज परेशान

भोपाल। जेपी अस्पताल में रोगियों की मदद के लिए हेल्प डेस्क तैयार की गई है। वहां कर्मचारी एक प्रकार से कर्मचारी समय गुजारने के लिए पहुंच रहे हैं। हर दिन मरीज परेशान हो रहे हैं, लेकिन उन्हें इनका कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। रोगियों ने ही यह समस्या बताई है। हेल्प डेस्क का उद्देश्य भी यही था कि पर्चा काउंटर पर यदि कोई मरीज किसी बात से अनजान है तो उसे पूरी जानकारी दी जाए। हर दिन गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं, जो चलने फिरने में असमर्थ हैं।
इन्हें व्हील चेयर से डाक्टर तक ले जाने में अनेक दिक्कतें आ रही हैं। जबकि डेस्क का यह दायित्व है कि वह मरीज को व्हील चेयर उपलब्ध करवाकर वार्ड ब्याय के माध्यम से रोगी को डाक्टर तक भेजने में मदद करें। लेकिन इस गंभीरता के साथ काम नहीं हो रहा है। रोजाना की यही स्थिति बनी है। अटेंडर स्वयं व्हील चेयर तलाश रहे और वह अपने रोगी को डाक्टर के पास ले जा रहे हैं। इसमें उनका काफी वक्त बर्बाद हो रहा है।
जेपी अस्पताल अधीक्षक ने अपने औचक भ्रमण में यह स्थिति देखी। मरीज स्वयं व्हील चेयर तलाश कर रोगी को डाक्टर तक ले जा रहे थे। तब मरीजों ने बताया कि यहां कोई सुनने वाला नहीं है। रोगियों ने सवाल भी किया गया कि जब वे यहां की स्थिति अनजान है तो उनको हेल्प डेस्क कर्मचारियों को गाइड करते हुए सहयोग करना चाहिए। ऐसी व्यवस्था यहां क्यों नहीं हो रही है। अनेक मरीज दूसरे जिलो से यहां अपना उपवचासर कराने के लिए आये हुए थे।
हालांकि जेपी अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि अब हर स्तर पर मरीजों की निगरानी की सशक्त व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि रोगियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।जेपी अस्पताल में अगस्त माह के दौरान पांच बार्ड ब्याय को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी इनके काम में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है।
इधर बार्ड ब्याय ने भी अस्पताल में अपनी समस्या बताई। इनका कहना था कि उनकी संख्या कम है, जो पद संरचना है। उसके अनुपात में इन कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं है। अब जो कर्मचारी मौजूद हैं, उन पर क्षमता से अधिक भार है। मरीज प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, जबकि भर्तियां की नहीं जा रही हैं।
इन्हें व्हील चेयर से डाक्टर तक ले जाने में अनेक दिक्कतें आ रही हैं। जबकि डेस्क का यह दायित्व है कि वह मरीज को व्हील चेयर उपलब्ध करवाकर वार्ड ब्याय के माध्यम से रोगी को डाक्टर तक भेजने में मदद करें। लेकिन इस गंभीरता के साथ काम नहीं हो रहा है। रोजाना की यही स्थिति बनी है। अटेंडर स्वयं व्हील चेयर तलाश रहे और वह अपने रोगी को डाक्टर के पास ले जा रहे हैं। इसमें उनका काफी वक्त बर्बाद हो रहा है।
जेपी अस्पताल अधीक्षक ने अपने औचक भ्रमण में यह स्थिति देखी। मरीज स्वयं व्हील चेयर तलाश कर रोगी को डाक्टर तक ले जा रहे थे। तब मरीजों ने बताया कि यहां कोई सुनने वाला नहीं है। रोगियों ने सवाल भी किया गया कि जब वे यहां की स्थिति अनजान है तो उनको हेल्प डेस्क कर्मचारियों को गाइड करते हुए सहयोग करना चाहिए। ऐसी व्यवस्था यहां क्यों नहीं हो रही है। अनेक मरीज दूसरे जिलो से यहां अपना उपवचासर कराने के लिए आये हुए थे।
हालांकि जेपी अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि अब हर स्तर पर मरीजों की निगरानी की सशक्त व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि रोगियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।जेपी अस्पताल में अगस्त माह के दौरान पांच बार्ड ब्याय को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी इनके काम में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है।
इधर बार्ड ब्याय ने भी अस्पताल में अपनी समस्या बताई। इनका कहना था कि उनकी संख्या कम है, जो पद संरचना है। उसके अनुपात में इन कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं है। अब जो कर्मचारी मौजूद हैं, उन पर क्षमता से अधिक भार है। मरीज प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, जबकि भर्तियां की नहीं जा रही हैं।
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