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Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ, बोलीं– जय जोहार…यहां मुझे अपने घर जैसा लगता है

Bastar Pandum 2026

Bastar Pandum 2026: जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पारंपरिक अभिवादन “जय जोहार” के साथ किया। जगदलपुर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। राष्ट्रपति ने स्थानीय बोली में सियान-सजन और पिला मन को आशीर्वाद देते हुए जनता का अभिवादन किया और कहा कि बस्तर आकर उन्हें अपने घर जैसा अपनापन महसूस होता है।


Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि, लोक परंपराओं और आदिवासी समाज की विरासत को नमन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य है जहां संस्कृति की भव्यता और परंपराओं की गहराई साफ दिखाई देती है। एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचते समय उन्हें प्रदेश की झलक हर कदम पर देखने को मिली। उन्होंने बताया कि 5 हजार से अधिक बच्चों द्वारा किया गया स्वागत उनके लिए अविस्मरणीय क्षण रहा।


Bastar Pandum 2026: बस्तर पंडुम की परंपरा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व प्रकृति से जुड़ा उत्सव है, जो मौसम परिवर्तन के साथ नई ऊर्जा का संदेश देता है। उन्होंने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस वर्ष 50 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी बस्तर की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाती है। उन्होंने बस्तर की गुफाओं, जलप्रपातों और प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील बताया और कहा कि होम स्टे जैसी पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।


Bastar Pandum 2026: अपने भाषण में राष्ट्रपति मुर्मू ने बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में हुए प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह क्षेत्र माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा, जिससे युवाओं और आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। अब स्थिति बदल रही है, लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरकार द्वारा पुनर्वास और विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों में सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।


Bastar Pandum 2026: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा को अपनाएं और सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर आगे बढ़ें। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत ही है कि एक छोटे से गांव की बेटी आज देश की सर्वोच्च संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रही है। उन्होंने एकलव्य विद्यालयों जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।


Bastar Pandum 2026: अंत में राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, विशेषकर बस्तर दशहरा को विश्व स्तर का मॉडल बताया और प्रदेशवासियों से विकास और समृद्धि की राह पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन “जय हिंद, जय भारत, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” के साथ किया।

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