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एमपी विस शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन: विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी नोक-झोंक, अनोखे प्रदर्शन और नई योजनाओं पर चर्चा

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एमपी विस शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन: विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी नोक-झोंक, अनोखे प्रदर्शन और नई योजनाओं पर चर्चा
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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र अपने तीसरे दिन हंगामेदार रहा। इस दिन विपक्षी विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया और सरकार को घेरा। खासतौर पर कांग्रेस ने सत्ता पक्ष के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने विधानसभा में गले में शराब की बोतलों की माला पहनकर प्रवेश किया। उनका आरोप था कि प्रदेश में शराब घोटाले हो रहे हैं, और सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

इसके अलावा, कांग्रेस के अन्य विधायकों ने चाय की केतली लेकर प्रदर्शन किया, जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई और कहा कि सदन में इस तरह के प्रदर्शन उचित नहीं हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गांधी जी की प्रतिमा के पास शराब की बोतलें ले जाकर अपमान किया है। वहीं, बाप पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा में मौन धारण किया और कहा कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा, इस कारण उन्होंने चुप्पी साधी। उनकी ओर से यह प्रदर्शन विधानसभा की कार्यवाही पर निरंतरता की मांग को लेकर था।

नेता प्रतिपक्ष ने उठाया बाबा साहब के अपमान का मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने शून्यकाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर की गई टिप्पणी पर विरोध जताया और इसे संविधान व अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान बताया। उन्होंने माफी की मांग की। इस मुद्दे को लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ, जिससे अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

ट्रांसफर और कर्ज पर विपक्षी सवाल

उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने 10 महीने में 438 ट्रांसफर होने का मुद्दा उठाया, जिसे उन्होंने प्रशासनिक अराजकता बताया। उनका कहना था कि लगातार ट्रांसफर से अधिकारी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर वित्तीय प्रबंधन की कमी का आरोप भी लगाया और कहा कि सरकार को कर्ज लेने की मजबूरी हो रही है।

अनुपूरक बजट पर हुई चर्चा

सदन में अनुपूरक बजट पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1111 करोड़ रुपए के विभिन्न कार्यों के लिए प्रावधान किया गया है। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाया, खासकर कर्ज के बढ़ते बोझ और ट्रांसफरों को लेकर। वहीं, सत्ता पक्ष ने इसे विकास कार्यों को निरंतर जारी रखने का कदम बताया और मुख्यमंत्री की वित्तीय प्रबंधन की सराहना की।

जनविश्वास कानून: नई पहल

मध्य प्रदेश सरकार जनविश्वास कानून लाने जा रही है, जिसके तहत विभिन्न उल्लंघनों पर जुर्माने का दायरा बढ़ाया जाएगा। यह कानून 1 जनवरी 2025 से लागू करने का प्रस्ताव है, और इसके माध्यम से सरकारी विभागों के कार्यों में पारदर्शिता और जनता को राहत देने की कोशिश की जा रही है। शीतकालीन सत्र का यह तीसरा दिन विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस और अनोखे प्रदर्शन का साक्षी रहा, और राज्य की सरकार ने नई योजनाओं को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई।


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