CG News : मशरूम फैक्ट्री से 97 बंधुआ मजदूर मुक्त, 10 दिन के बच्चे समेत महिलाओं का शोषण, जांच शुरू
- Rohit banchhor
- 11 Jul, 2025
इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिनमें एक 10 दिन का नवजात भी है।
CG News : रायपुर। जिले के खरोरा क्षेत्र में एक मशरूम फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 97 मजदूरों को बंधक स्थिति से मुक्त कराया है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिनमें एक 10 दिन का नवजात भी है।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी वीरेंद्र ने बताया कि ठेकेदार भोला ने उन्हें “मशरूम पैकिंग” का आसान काम और 10,000 मासिक वेतन का लालच देकर रायपुर लाया था। लेकिन यहां पहुंचने पर मजदूरों को मशरूम काटने, भारी बोझ उठाने जैसे कठिन कामों में लगाया गया। उन्हें 16 से 18 घंटे काम करना पड़ता था। थकान के कारण सोने की कोशिश करने पर मारपीट की जाती थी और उन्हें कमरों में बंद रखा जाता था। खाने में केवल अधपका चावल और दाल दी जाती थी, और बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।
अंधेरे में भागे मजदूर, पैदल पहुंचे रायपुर-
लंबे समय से हो रहे शोषण से तंग आकर 2 जुलाई की रात कुछ मजदूर अंधेरे का फायदा उठाकर फैक्ट्री से भाग निकले। उन्होंने 15-20 किलोमीटर पैदल चलकर रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड पहुंचकर मदद मांगी। स्थानीय लोगों ने उनकी स्थिति देखकर पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना दी, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ।
97 मजदूरों का रेस्क्यू, महिलाएं और बच्चे भी शामिल-
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तत्काल छापेमारी की गई। फैक्ट्री से 97 मजदूरों को मुक्त कराया गया, जिनमें उत्तर प्रदेश के भदोही से 30, जौनपुर से 38, बनारस से 5 और बिहार-झारखंड से 24 मजदूर शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और एक 10 दिन का नवजात भी शामिल है, जिसकी मां ने रायपुर में ही बच्चे को जन्म दिया था।
शोषण की जांच में जुटी पुलिस और विभाग-
महिला मजदूरों और बच्चों के साथ हुए शोषण की जांच शुरू कर दी गई है। सभी मजदूरों के बयान दर्ज किए गए हैं और ठेकेदार भोला सहित फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी चल रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और श्रम विभाग को भी सूचित किया गया है।

