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2nd Day of Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, जानिए उनकी पसंदीदा भोग, मंत्र, विधि और कथा

2nd Day of Chaitra Navratri

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2nd Day of Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, जानिए उनकी पसंदीदा भोग, मंत्र, विधि और कथा
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2nd Day of Chaitra Navratri: धर्म डेस्क: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह दिन साधना, संयम और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें मानसिक शांति व आत्मबल प्राप्त होता है।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी होता है। वे तप में लीन रहती हैं और उनके चेहरे पर दिव्य आभा झलकती है। उनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है, जो तपस्या और साधना का प्रतीक है। “ब्रह्मचारिणी” शब्द में ‘ब्रह्म’ का अर्थ तप और ‘चारिणी’ का अर्थ उसका आचरण करने वाली है। इस रूप में देवी त्याग, धैर्य और संयम की प्रेरणा देती हैं।

पूजा का महत्व और लाभ

इस दिन मां की पूजा करने से जीवन में धैर्य, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही क्रोध, आलस्य, ईर्ष्या और स्वार्थ जैसी नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से साधक को लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

पूजन विधि और भोग

नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद वस्त्र धारण कर पूजा करना शुभ माना जाता है। मां को प्रसन्न करने के लिए चीनी, मिश्री, पंचामृत का भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही गुड़हल और कमल के फूल चढ़ाना भी विशेष फलदायी माना गया है। इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।




मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने पूर्व जन्म में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने हजारों वर्षों तक फल-फूल, फिर पत्तों और अंत में निराहार रहकर तप किया। कठोर साधना के कारण उन्हें “अपर्णा” नाम भी मिला। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।

कथा से मिलने वाली सीख

मां ब्रह्मचारिणी की कथा हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और दृढ़ संकल्प बनाए रखना चाहिए। सच्ची निष्ठा और तपस्या से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।


ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥


2nd Day of Chaitra Navratri: मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता,

जय चतुरानन प्रिय सुखदाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो,

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा,

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता,

जो मन निसदिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए,

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने,

जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला लेकर,

जपे जो मंत्र श्रद्धा देकर।

आलस छोड़ करे गुणगाना,

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्मचारिणी तेरो नाम,

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी,

रखना लाज मेरी महतारी।


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