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एमपी बोर्ड के मान्यता नियमों को लेकर निजी स्कूलों में लटके ताले, पढ़ाई हुई प्रभावित

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सरकार ने मान्यता पर रजिस्टर्ड किराया नामा व सुरक्षा निधि और प्रत्येक वर्ष रिन्युअल फीस के नए नियमों के मापदंड निर्धारित किए हैं।

MP News : भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से मान्यता देने की प्रक्रिया को जटिल किए जाने के विरोध में मध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े स्कूल गुरुवार को बंद रहे। नियम जटिल होने के कारण प्राइवेट स्कूल संचालक उनकी पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। आंदोलन के चलते सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर रहा। प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि राजधानी समेत देशभर में आइटीई का नियम लागू है। बावजूद इसके मान्यता के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शुल्क लिया जा रहा है। सरकार ने मान्यता के नियमों को बहुत जटिल कर दिया है।


MP News : इससे सबसे अधिक कठिनाई ग्रामीण जिलों में हो रही है। एफडी अमाउंट में बढ़ोतरी को भी वापस लेने की मांग की जा रही है। इससे पहले हम सीएम से लेकर शिक्षा मंत्री व अपने-अपने जिलों के विधायकों के सामने इस संबंध में गुहार लगा चुके हैं। अब मांगों को लेकर गुरुवार को एक दिन के लिए स्कूल बंद रखे हैं। इसके बाद भी मांगों का निराकरण नहीं होता है, तो राजधानी में हल्ला बोल शुरु किया जाएगा। मप्र में 80 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी वार्षिक फीस लगभग 8 हजार से 25 हजार के बीच है। 15 से 20 प्रतिशत स्कूलों फीस डूब जाती है। वर्तमान में 40 से 50 प्रतिशत स्कूलों में आरटीई योजना के बच्चे भी पढ़ रहे हैं।


MP News : इनकी राशि सरकार दो-दो साल देरी से देती है, जिससे स्कूलों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। जबकि राजपत्र में आरटीई का भुगतान सत्र के अंत मार्च व मई में देने का प्रावधान है। कई स्कूलों का तकनीकी समस्या के कारण प्रपोजल नहीं बनने के कारण 2016 से 2022 तक का भुगतान भी आज तक नहीं हुआ है। सरकार इनके विषय में कोई विचार नहीं कर रही है। प्राइवेट स्कूलों पर थोपे जा रहे नए नियमः इन परिस्थितियों में शिक्षा विभाग ने राजस्व बढ़ाने के लिए मान्यता के नए नियमों को प्राइवेट स्कूलों पर थोप दिया है। जब से प्रदेश में प्राइवेट स्कूल प्रारंभ हुए हैं, तब से नोटरीकृत किराया नामा को महत्व दिया गया था। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खुले स्कूलों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने मान्यता पर रजिस्टर्ड किराया नामा व सुरक्षा निधि और प्रत्येक वर्ष रिन्युअल फीस के नए नियमों के मापदंड निर्धारित किए हैं।

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