केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा, भारत ने जारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया
नई दिल्ली: केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन के राष्ट्रपति राशद अल-अलिमी ने मौत की सजा पर मुहर लगा दी है। निमिषा को 2017 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। परिवार ने ब्लड मनी के जरिए सजा माफ करवाने के लिए $40,000 (₹34.2 लाख) जुटाए थे, लेकिन वार्ता असफल रही।
घटना और सजा
निमिषा 2008 में यमन गई थीं और 2017 में बिजनेस पार्टनर से विवाद के दौरान हत्या हो गई। 2018 में गिरफ्तार होने के बाद 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। नवंबर 2023 में सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने सजा बरकरार रखी।
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास असफल
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई नेताओं ने हस्तक्षेप किया, लेकिन निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भारत सरकार ने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
परिवार की टूटती उम्मीदें
निमिषा की मां और पति ने सजा माफ करवाने की हर कोशिश की, लेकिन यमन राष्ट्रपति के फैसले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब परिवार कानूनी और कूटनीतिक विकल्प तलाश रहा है।
क्या होता है ब्लड मनी ?
यमन के संविधान में इस्लाम को राज्य धर्म घोषित किया गया है और यहां की कानून प्रणाली इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित है। इस कानून में ब्लड मनी का प्रावधान किया गया है, जो अपराध के मामलों में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का एक विकल्प देता है। इस्लामी कानून के अनुसार, पीड़ित परिवार को यह तय करने का अधिकार है कि अपराधी को किस प्रकार दंडित किया जाए। इसके लिए दो विकल्प मौजूद हैं। पहला विकल्प क़िसास है, जिसका अर्थ "जान के बदले जान" होता है। इसके तहत, पीड़ित परिवार अपराधी के लिए मौत की सजा चुन सकता है। दूसरा विकल्प दियाह है, जिसे ब्लड मनी कहा जाता है। इसमें मारे गए व्यक्ति का परिवार, दोषी के परिवार से एक तय धनराशि लेकर अपराधी को माफी दे सकता है। ब्लड मनी का प्रावधान विवादित मामलों में समाधान का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है और यह पीड़ित परिवार को न्याय के साथ संतोष का अवसर प्रदान करता है।


