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फरार एसआई ‘बंटी-बबली’ गिरफ्तार, 1 करोड़ का सोना और 12 लाख कैश बरामद

MP Crime

इंदौर के सावर रोड स्थित एमरल्ड सिटी से पकड़े गए इन आरोपियों के पास से 1.2 किलोग्राम सोना, 12 लाख रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।

MP Crime : इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दिल्ली पुलिस ने एक सनसनीखेज ऑपरेशन में फरार चल रहे दो सब-इंस्पेक्टर्स, जिन्हें ‘बंटी-बबली’ के नाम से जाना जाता है को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर दिल्ली में साइबर ठगी के मामलों में जब्त बैंक खातों से 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़पने और फरार होने का आरोप है। इंदौर के सावर रोड स्थित एमरल्ड सिटी से पकड़े गए इन आरोपियों के पास से 1.2 किलोग्राम सोना, 12 लाख रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।


साइबर ठगी का पैसा लेकर फरार हुए थे दोनों एसआई-

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी सब-इंस्पेक्टर अंकुर मालिक नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के साइबर थाने में तैनात थे, जहां वे कई साइबर ठगी के मामलों की जांच कर रहे थे। उनकी सहयोगी, महिला सब-इंस्पेक्टर नेहा पुनिया, शाहदरा जिले में तैनात थीं। दोनों ने मिलकर 2023-24 के दौरान तीन साइबर ठगी मामलों में जब्त रकम को फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोर्ट से रिलीज करवाया और उसे अपने परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया। इसके बाद मार्च 2024 में मालिक ने मेडिकल लीव और नेहा ने अन्य छुट्टी लेकर दिल्ली छोड़ दिया और फरार हो गए।


गोवा, मनाली और कश्मीर में बिताए आलीशान दिन-

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि दोनों ने चुराई गई रकम से गोवा, मनाली और कश्मीर जैसे पर्यटन स्थलों पर शानदार छुट्टियां मनाईं। पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने नकदी को 1.2 किलोग्राम सोने में बदला, जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक है। तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर दिल्ली पुलिस ने चार महीने की तलाश के बाद दोनों को इंदौर में धर दबोचा। दोनों फर्जी पहचान के साथ मध्य प्रदेश में नया जीवन शुरू करने की योजना बना रहे थे।


तीन अन्य सहयोगी भी गिरफ्तार-

पुलिस ने इस मामले में तीन अन्य लोगों मोहम्मद इलियास (40), आरिफ (35) और शादाब (23) को भी गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों में चुराई गई रकम ट्रांसफर की गई थी। ये सभी दिल्ली के निवासी हैं। पूछताछ में पता चला कि अंकुर मालिक ने साइबर ठगी के मामलों में जब्त रकम को फर्जी शिकायतकर्ताओं के नाम पर रिलीज करवाया था, जिसे बाद में विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया।

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