भोपाल में लगे फाउंटेन बंद, कैसे साफ होगी राजधानी की आबोहवा
भोपाल। राजधानी भोपाल के चौक चौराहों की सुंदरता बढ़ाने और प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम द्वारा लगाए गए फाउंटेन बंद पड़े हुए हैं। जबकि अभी शहर में प्रदूषण बढ़ा होने से इनकी सबसे ज्यादा जरूरत हैं। जानकारी के मुताबिक राजधानी के प्रमुख चौक चौराहों पर 85 और तालाबों में 21 फाउंटेन लगाए गए हैं। लेकिन, इनमें से अधिकतर फाउंटेन बंद हैं। यह स्थिति तब है जब इन फाउंटेन की उपयोगिता सबसे ज्यादा वर्तमान में है। दरअसल, सर्दी तेज़ होने से तालाबों के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। ऐसे में मछलियों समेत तालाब में पाएं जाने वाले दूसरे जलीय जीवों का भी जीवन खतरे में पड़ जाता है। अगर फाउंटेन चलाए जाएं तो तालाबों के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा में इजाफा होता है।
दूसरी ओर अभी शहर की हवा में प्रदूषण खासा बढ़ा हुआ है। चूंकि, फाउंटेन के चलने से उनके आसपास सीमित क्षेत्र में प्रदूषण कम होता है। अगर वर्तमान में यह फाउंटेन चलते हैं तो छोटी ही सही पर राहत तो मिलेगी। लेकिन आलम यह है कि जिम्मेदार बंद पड़े फाउंटेनों को शुरू कराने के लिए कागजी कार्रवाई में ही अटके हैं। सूत्रो की मानों तो फाउंटेन बीते दो साल से बंद हैं। इन्हें चालू करने के लिए नगर निगम बीते 6 महीने से प्रयास कर रहा है, लेकिन इनके लिए कोई रखवाला नहीं मिल रहा है। दरअसल सभी 85 फाउंटेन का मेंटनेंस, रखरखाव के लिए निगम को एजेंसी की तलाश है।
दो बार टेंडर लगाने के बाद भी किसी एजेंसी ने दिलचस्पी नहीं ली। निगम इन फाउंटेन के लिए करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च करने को भी तैयार है। गौरतलब है कि भोपाल शहर की आबोहवा शुद्ध रखने के लिए नगर निगम ने बीते साल सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के अलावा दशहरा और दीपावली पर प्रमुख स्थानों पर भी पानी का स्प्रे करवाया। लेकिन हवा को शुद्ध रखने के लिए कारगर साबित होने वाले फाउंटेन पर ध्यान नहीं दिया। बीते दो सालों से शहर के ज्यादातर फाउंटेन बंद हैं, जबकि सभी फाउंटेन में पानी के कनेक्शन लगे हुए हैं। इसके बाद भी निगम इन्हें चालू नहीं कर पा रहा है।

