DDU ऑडिटोरियम में फिल्म महोत्सव: सिनेमा प्रेमियों के लिए शानदार आयोजन
रायपुर: रायपुर के DDU ऑडिटोरियम में आयोजित फिल्म महोत्सव में सिनेमा प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में फिल्म और डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग, चर्चाएं, कार्यशालाएं और पुरस्कार समारोह जैसे सत्र शामिल रहे। संकल्प हॉल में फिल्म और डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसमें मंद्राजी, चिंतराम और जुनून और ज़माना जैसी फ़िल्में प्रदर्शित की गईं। इसके अलावा, "ज़िंदगी…कैसी है पहेली.." सत्र में संजय अलुंग, रवि वल्लुरी, अज़ीम उद्दीन, भगवत जयसवाल और दिव्यांश ने अपने विचार साझा किए।
"इस रोती हुई धरती, ये विलाप करते किनारे.." नामक अंतरराष्ट्रीय स्वदेशी संवाद में सेसिलिया डियाज, किरण भट, मीर अली मीर और मुकेश पांडे ने भाग लिया। दिन का समापन पुरस्कार समारोह के साथ हुआ। सिद्धि हॉल में हिंदी और बहुभाषीय शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन हुआ, जिसमें "कदम, बंटूज़ गैंग, बोटल, द स्ट्रीट एंजल, 04 और बिटवीन वर्ल्ड्स" जैसी हिंदी शॉर्ट फिल्में प्रदर्शित की गईं। इसके अलावा, "ब्यानव (राजस्थानी), प्रदक्षिणा (मराठी), अनाउंसमेंट - ए मार्टर स्टोरी (हिंदी), थुनई (तमिल), हेल्प योरसेल्फ (अंग्रेजी/हिंदी), मन आसाई (तमिल), जमगहीन (छत्तीसगढ़ी), कमजाखिला (अन्य) और द फर्स्ट फिल्म (हिंदी)" जैसी विभिन्न भाषाओं की फिल्मों को भी दिखाया गया।
फिल्म निर्माण और लेखन में रुचि रखने वालों के लिए बोर्ड रूम में कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी (कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर) ने "फिल्म निर्माण की अवधारणा" पर एक गहन चर्चा की। इसके बाद लक्ष्मी वल्लुरी ने "परफेक्ट योर मैनुस्क्रिप्ट" कार्यशाला का संचालन किया। बीरजू कुमार रजक (AAFT यूनिवर्सिटी, रायपुर) ने "भावनाओं को एडिटिंग के माध्यम से व्यक्त करना" विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
इस फिल्म महोत्सव ने युवाओं, फिल्म प्रेमियों और इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों को एक बेहतरीन मंच प्रदान किया, जहां वे न सिर्फ अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री से जुड़ सके, बल्कि फिल्म निर्माण की बारीकियों को भी समझ सके। इस आयोजन ने सिनेमा के प्रति रुचि रखने वाले लोगों को प्रेरित किया और फिल्म इंडस्ट्री में नए आयाम स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।

