MP News : MP का ‘दूसरा महाकाल’, कालीसिंध तट पर बसी सुंदरसी, विक्रमादित्य की आस्था से जुड़ी अनोखी नगरी
- Rohit banchhor
- 13 Feb, 2026
सुंदरसी, उज्जैन से लगभग 70–80 किमी और जिला मुख्यालय शाजापुर से 30–35 किमी दूर स्थित है।
MP News : शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले का सुंदरसी कस्बा अपने प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर के कारण विशेष पहचान रखता है। कालीसिंध नदी के तट पर स्थित यह मंदिर, धार्मिक नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की तर्ज पर निर्मित माना जाता है। सुंदरसी, उज्जैन से लगभग 70–80 किमी और जिला मुख्यालय शाजापुर से 30–35 किमी दूर स्थित है।
विक्रमादित्य और बहन सुंद्राबाई की कथा-
लोक मान्यताओं के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य की छोटी बहन सुंद्राबाई का विवाह सुंदरसी के राजकुमार कुंवर भगत सिंह से हुआ था। कहा जाता है कि सुंद्राबाई अवंतिका (उज्जैन) के प्रमुख तीर्थों के दर्शन किए बिना अन्न-जल ग्रहण नहीं करती थीं। बहन की अटूट श्रद्धा को देखते हुए विक्रमादित्य ने अवंतिका के प्रमुख तीर्थों की स्थापना सुंदरसी में करवाई। इसी कारण यह क्षेत्र कभी ‘अवंतिका’ के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ। समय के साथ सुंद्राबाई के नाम पर इसका नाम सुंदरगढ़ और फिर सुंदरसी पड़ गया।
इतिहासकारों के अनुसार, यह नगरी कभी लगभग 100 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली थी। आजादी से पहले इसके अधीन 84 गांव आते थे, जो विभिन्न रियासतों—धार, देवास, इंदौर और ग्वालियर—में विभाजित थे। यहां चार थाने, चार कचहरियां और यहां तक कि एक संयुक्त अदालत भी थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त थीं।
गर्भगृह का रहस्यमयी कुंड-
सुंदरसी के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में बना कुंड विशेष आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इसका मार्ग उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर तक जाता था और साधु-महात्मा इसी रास्ते से आवागमन करते थे। हालांकि मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस कुंड का उपयोग शिवलिंग के अभिषेक के लिए किया जाता था।
‘सूरज कुंड’ का अनसुलझा रहस्य-
मंदिर के पीछे स्थित सूरज कुंड भी रहस्य से घिरा है। स्थानीय मान्यता है कि इसमें पानी का स्रोत आज तक स्पष्ट नहीं हो सका—न यह पूरी तरह सूखता है, न ही इसका उद्गम ज्ञात है। मंदिर परिसर में प्राचीन मूर्तियों के अवशेष भी बिखरे हुए हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं। मंदिर में महाकाल के अलावा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां और नवग्रह मंदिर भी बने हुए हैं। आस्था, इतिहास और रहस्य का संगम बना सुंदरसी का महाकालेश्वर मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है।

