India-US trade deal: पूरा जम्मू-कश्मीर और अक्साई चिन भारत का है, ट्रेड डील के साथ US ने जारी किया अखंड भारत का नक्शा
India-US trade deal: नई दिल्ली। नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच शनिवार को हुए अंतरिम व्यापार समझौते की चर्चा जितनी इसके आर्थिक पहलुओं को लेकर है, उससे कहीं अधिक चर्चा अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी किए गए भारत के एक नक्शे (Map) को लेकर हो रही है।
India-US trade deal: ट्रंप प्रशासन के इस कदम ने न केवल सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भी बड़े संकेत दे दिए हैं। बता दें कि इससे पहले भारत यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड समझौता के बाद यूरोपियन यूनियन ने भी अखंड भारत का नक्शा जारी किया था, जिसमें पीओके और अक्काई चीन को भारत का हिस्सा बताया था।
India-US trade deal: नक्शे में क्या है खास
अमूमन अंतरराष्ट्रीय मंचों और पश्चिमी देशों के सरकारी नक्शों में जम्मू-कश्मीर के विवादित हिस्सों को अलग रंग या 'डॉटेड लाइन्स' से दिखाया जाता है। लेकिन इस बार यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के कार्यालय द्वारा जारी नक्शे ने सबको चौंका दिया।
India-US trade deal: संपूर्ण जम्मू-कश्मीर:
नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया है। इसमें पीओके (POK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) को भी भारतीय सीमा के भीतर दर्शाया गया है।
India-US trade deal: अक्साई चिन भी शामिल:
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस नक्शे में अक्साई चिन को भी भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जिस पर वर्तमान में चीन का कब्जा है और वह इसे अपना क्षेत्र बताता है।
India-US trade deal: सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
जैसे ही व्यापार समझौते के विवरण के साथ यह नक्शा सार्वजनिक हुआ, यह इंटरनेट पर वायरल हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक बातचीत के बीच इस तरह का नक्शा जारी करना महज कोई 'तकनीकी गलती' नहीं हो सकती, बल्कि यह चीन और पाकिस्तान को दिया गया एक कड़ा संदेश हो सकता है।
India-US trade deal: क्या हैं इस कदम के मायने
अमेरिका के इस कदम को कई नजरियों से देखा जा रहा है। यह दर्शाता है कि रक्षा के साथ-साथ अब व्यापारिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी अमेरिका, भारत के रुख के करीब आ रहा है। अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाकर ट्रंप प्रशासन ने ड्रैगन को स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय विवादों में भारत के दावे का समर्थन करता है। पीओके को भारत के नक्शे में शामिल करना पाकिस्तान के उस नैरेटिव को कमजोर करता है जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश करता रहता है।

