Raipur City News : अमेरिका ने लौटाई छत्तीसगढ़ की अनमोल अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा
Raipur City News : रायपुर। अंतरराष्ट्रीय तस्करी के जाल में फंसी भारत की गौरवशाली विरासत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। अमेरिका ने 657 प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुओं और दुर्लभ मूर्तियों को भारत को सौंप दिया है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 133 करोड़ रुपये आंकी गई है।
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने ये पुरावशेष भारतीय दूत राजलक्ष्मी कदम को सौंपे। इन लौटाई गई वस्तुओं में सबसे प्रमुख ‘अवलोकितेश्वर’ की कांस्य प्रतिमा है। इसकी कीमत करीब 19 करोड़ रुपये है।
यह प्रतिमा शेरों के सिंहासन पर द्वि-कमल आसन पर विराजमान है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह मूर्ति 1939 में छत्तीसगढ़ के सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर के पास मिले कांस्य भंडार का हिस्सा थी।
वर्ष 1952 तक यह रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय की शोभा बढ़ाती रही, लेकिन 1982 में इसे अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह ने चुराकर अमेरिका भेज दिया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब इसकी घर वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
कुख्यात तस्करों के जाल से मुक्त हुई विरासत-
लौटाई गई सामग्री में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटी गई नृत्य करते गणेश की बलुआ पत्थर की प्रतिमा भी शामिल है। इसे कुख्यात कला तस्कर सुभाष कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने साल 2000 में चुराया था। बाद में इसे कुख्यात तस्कर वामन घिया के जरिए न्यूयॉर्क की एक गैलरी को बेचा गया। मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय की सक्रियता से इसे एक निजी संग्रहकर्ता से बरामद किया गया।
कूटनीतिक प्रयासों की बड़ी सफलता-
भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियों की वापसी को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने कहा कि ये वस्तुएं केवल कलाकृतियां नहीं हैं, बल्कि एक राष्ट्र की पहचान और आस्था का प्रतीक हैं।
जल्द ही इन सभी प्रतिमाओं को विशेष सुरक्षा के बीच भारत लाया जाएगा, जिसके बाद छत्तीसगढ़ की ‘अवलोकितेश्वर’ प्रतिमा को पुन: उसके मूल स्थान या संग्रहालय में स्थापित किया जा सकेगा।

