Bombay high court: पत्नी को ताना मारना, टीवी देखने नहीं देना क्रूरता नहीं हो सकती, जानें किस मामले में कोर्ट ने कही ये बात
- Pradeep Sharma
- 10 Nov, 2024
Bombay high court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक हैरान करने वाला फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी को ताना मारना, उसे अकेले मंदिर नहीं जाने देना या कालीन पर
मुंबई। Bombay high court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक हैरान करने वाला फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी को ताना मारना, उसे अकेले मंदिर नहीं जाने देना या कालीन पर सुलाना आईपीसी की धारा 498ए के तहत 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता।
Bombay high court: जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने आईपीसी की धारा 498ए और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति और उसके परिवार को बरी कर दिया। कथित तौर पर उनकी हरकतों की वजह से 2002 में एक महिला ने आत्महत्या कर ली थी। बेंच आरोपी की अपील पर मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे अप्रैल 2004 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था।
Bombay high court: आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि मृतक महिला को अकेले कूड़ा फेंकने की अनुमति नहीं थी और उसे आधी रात को पानी लाने के लिए भी कहा गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि क्रूरता के ऐसे आरोपों को संबंधित धारा के तहत गंभीर नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह घर के घरेलू मामलों से संबंधित है।
Bombay high court: अदालत ने कहा कि इसे कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने यह भी तर्क दिया कि क्रूरता, जो मानसिक या शारीरिक हो सकती है, सापेक्ष है और इसका इस्तेमाल स्ट्रेटजैकेट तरीके से नहीं किया जा सकता।
Bombay high court: न्यायमूर्ति अभय एस वाघवासे ने अपने आदेश में लिखा कि केवल चटाई पर सोना भी क्रूरता नहीं माना जाएगा। इसी तरह किस तरह का ताना मारा गया और किस आरोपी ने यह स्पष्ट नहीं किया है। इसी तरह उसे पड़ोसियों के साथ घुलने-मिलने से रोकना भी उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। न्यायाधीश ने गवाहों की गवाही से यह भी नोट किया कि जिस गांव में महिला और उसके ससुराल वाले रहते थे, वहां आधी रात को पानी की आपूर्ति होती थी और सभी घर रात को 1:30 बजे पानी लाते थे।

