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मेधा पाटकर की अगुवाई में पीड़ितों ने शुरू किया जल सत्याग्रह, यह है प्रमुख मांग

भोपाल। सरदार सरोवर के क्षेत्र में डूबग्रस्त विस्थापित परिवारों की ओर से एक समूह ने मेधा पाटकर के साथ जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। इस सत्याग्रह का आज दूसरा दिन है। यह जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर दी है। उन्होंने लिखा कि हम यह अपेक्षा करते है कि जब जल सत्याग्रह के जरिए नर्मदा घाटी के लोग बड़वानी जिले में सरकार को चेतावनी दे रहे है, तो शासन भी केंद्रीय प्राधिकरण के जरिए जल प्रवाह पर नियंत्रण करेगा, जल नियमन करेगा और 135 मीटर से ऊपर जल स्तर को नहीं जाने देगा। पीड़ित परिवारों का कानून के अनुसार पुनर्वास भी किया जाएगा।
जल सत्याग्रहियों की मांग है कि सरदार सरोवर बांध का जल स्तर 135 मीटर से अधिक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बहुत सारे ऐसे परिवार हैं, जिनका 2023 तक पुनर्वास नहीं किया गया है, लेकिन बांध में पानी ज्यादा भरने से लोगों के मकान और खेत डूब में आ गए हैं, इससे बड़ा नुकसान हुआ है। डूब क्षेत्र से बाहर किए गए हजारों परिवार भी डूब रहे हैं और लाखों का नुकसान भुगत चुके हैं। उन्हें फिर से डूब का सामना नही करना पड़े। की व्यवस्था की जाए। जल सत्याग्रहियों का यह भी कहना है कि सुप्रीमकोर्ट के 2019 के आदेश अनुसार चारों मुख्यमंत्री और केंद्रीय जल मंत्री की रिव्यू कमेटी की जिम्मेदारी थी कि पुनर्वास पूरा नहीं हुआ है, तो सरदार सरोवर का जल स्तर कितना रखना चाहिए, इस पर निर्णय लिया जाए। नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार किसी भी परिवार की संपत्ति डुबाने के 6 महीने पहले पुनर्वास पूरा होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के हर आदेश के अनुसार ट्रिब्यूनल फैसले का पालन करना है। तब हजारों परिवारों का पुनर्वास बाकी होते हुए उनकी कोई भी संपत्ति डुबाना अवैध होगा और अन्याय भी है, इसलिए सरदार सरोवर बांध के गेट पूर्ण रूप से खोलने के साथ इन फ्लू और आउट फ्लू को बैलेंस करना बेहद जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर जैसे ऊपरी बांधों के भर जाने से पानी का निकास होना और वह पानी जल प्रवाह से सरदार सरोवर तक पहुंचना संभव है, तब यह जरूरी है कि सरदार सरोवर के गेट्स आज से अधिक मात्रा में खोलकर सरदार सरोवर डूब क्षेत्र के बड़वानी, धार, खरगोन जिले में जल स्तर को कम से कम 135 मीटर पर रोकना जरूरी है।
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