Top
Begin typing your search above and press enter to search.

भोपाल गैस त्रासदी: 40 साल बाद भी मुआवज़े के लिए संघर्ष कर रहे पीड़ित, न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की रिट याचिका

भोपाल गैस त्रासदी: 40 साल बाद भी मुआवज़े के लिए संघर्ष कर रहे पीड़ित, न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की रिट याचिका
X

भोपाल। विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड के 40 साल पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन इस गैस कांड का शिकार लोग आज भी न्याय के लिए परेशान हैं। गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले चार संगठनों ने पीड़ितों को मुआवजा के मामले में हुए अन्याय को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है।याचिका के माध्यम से 5 लाख रूपए प्रति व्यक्ति मुअवजा देने की गुहार लगाई हैं।

भोपाल ग्रुप फॉर इनफॉरमेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने बताया कि याचिका में उन्होंने कैंसर और किडनी जैसी घातक बीमारियों से ग्रस्त गैस पीड़ितों के लिए अतिरिक्त मुआवजे की मांग की गई है। इसमें वह लोग भी शामिल है,जो गैस की जद में आकर शारीरिक नुकसान को आज भी झेल रहे हैं। उन्हे गलत तरीके से अस्थाई क्षति की श्रेणी में रखा गया था।


संगठनो की मानों तो आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, कैंसर से ग्रस्त 11,278 पीड़ितों में से 90% और घातक किडनी रोगों से ग्रस्त 1855 पीड़ितों में से 91% को सरकार द्वारा इसके लिए अनुग्रह राशि का भुगतान किया गया, लेकिन उन्हें मुआवजे के रूप में केवल 25 हजार रुपये मिले।"गैस काण्ड से सेहत को पहुँचे नुकसान के गलत वर्गीकरण के मुद्दे को लेकर रचना ढींगरा ने कहा कि"यूनियन कार्बाइड के अपने दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मिथाइल आइसोसाइनेट के संपर्क से स्वास्थ्य को होने वाली क्षति स्थायी प्रकृति की है, फिर भी मुआवजे के लिए 93% दावेदारों को मुआवज़ा संचालनालय ‌द्वारा केवल "अस्थायी" तौर पर क्षतिग्रस्त माना गया है।

*गैस पीड़ितों को अपर्याप्त मुआवजा मिलने के पीछे यही मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि अपने आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि भोपाल गैस पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे में किसी भी तरह की कमी की भरपाई भारत सरकार को करनी होगी।


Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire