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एम्स अस्पताल ने किड़नी ट्रांसप्लांट कर दी 42 वर्षीय युवक को नई जिंदगी

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक और सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। ब्रेन डेड मरीज से मिली किडनी से एम्स में भर्ती 42 साल के मरीज को जीवनदान मिल गया। एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने इस उपलब्धि पर डॉक्टरों की टीम को शुभकामनाएं दी हैं। गौरतलब है कि एम्स में किडनी और बोन मेरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारी भी एम्स ने शुरू कर दी है। डोनर नहीं मिलने से कई जरूरतमंदों का ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा है। अब ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त किडनी ट्रांसप्लांट से मरीज को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया।
एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि एम्स भोपाल के लिए गर्व का क्षण है, जो हमारी एनेस्थीसिया, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी टीमों की समर्पण और विशेषज्ञता को दर्शाता है। इस सफल प्रत्यारोपण ने न केवल हमारी संस्थान की क्षमताओं को प्रदर्शित किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि हम जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं में सक्षम हैं और क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई मिसाल स्थापित कर रहे हैं। अंतिम चरण के गुर्दे की बीमारी से पीड़ित 42 वर्षीय मरीज को 8 नवंबर को ब्रेन डेड दाता से प्राप्त किडनी का प्रत्यारोपण हुआ। मरीज डायलिसिस पर था उसके परिवार में कोई मेल खाने वाला डोनर नहीं था। सफल सर्जरी और पोस्ट ऑपरेटिव रिकवरी के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में डिस्वार्ज किया गया।
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सफल प्रत्यारोपण दूसरे लोगों को भी प्रेरित करेगा
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्र आटलानी ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह सफल प्रत्यारोपण न केवल मरीज और उनके परिवार के लिए राहत का कारण है, बल्कि यह एम्स भोपाल की जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं में सक्षमता को प्रदर्शित करता है। यह सफलता दूसरे लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा, जिससे और अधिक जीवन बचाए जा सकेंगे। इस प्रत्यारोपण में यूरोलॉजिस्ट डॉ. देवाशिश कौशल, डॉ. के. माधवन, डॉ. केतन मेहरा, डॉ. निकिता श्रीवास्तव और एनेस्थीसिया टीम से डॉ. वैशाली वैणडेसकर, डॉ. सुनैना तजपाल कर्ना और डॉ. शिखा जैन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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