आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामले में पश्चिम बंगाल सरकार पहुंची हाईकोर्ट, दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी संजय रॉय को सियालदह कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने इस मामले में न्यायमूर्ति देबांगशु बसाक की खंडपीठ में अपील दायर की, जिसमें दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की गई। अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है।
इससे पहले सियालदह कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्रकैद और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि यह दुर्लभतम मामला नहीं है, इसलिए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा और 7 लाख रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया गया था। अदालत के इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी असंतुष्ट थीं। उन्होंने इसे दुर्लभतम अपराध करार देते हुए संजय रॉय के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
क्या है मामला?
यह घटना 9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल में हुई थी, जहां एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु महिला डॉक्टर का शव सेमिनार कक्ष में पाया गया था। जांच के दौरान आरोपी संजय रॉय को 10 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया। सियालदह की अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने भारतीय दंड संहिता की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत संजय रॉय को दोषी ठहराया। इस जघन्य अपराध ने देशभर में आक्रोश फैलाया था। लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन और न्याय की मांग जारी रही। अदालत ने अपने फैसले में संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई, जो कि न्यूनतम सजा थी, जबकि इस अपराध के लिए अधिकतम सजा मृत्युदंड हो सकती थी।
राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे दुर्लभतम अपराध बताते हुए कहा कि दोषी को मृत्युदंड मिलना चाहिए। महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने उच्च न्यायालय में दोषी के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए याचिका दायर की। अब इस पर उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।

