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मेघालय ने रचा चिकित्सा इतिहास: पहली बार सफल TAVI प्रक्रिया, स्वदेशी MYVAL हार्ट वॉल्व सिस्टम का हुआ इस्तेमाल

हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा सका।

मेघालय ने रचा चिकित्सा इतिहास: पहली बार सफल TAVI प्रक्रिया, स्वदेशी MYVAL हार्ट वॉल्व सिस्टम का हुआ इस्तेमाल
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शिलांग। मेघालय ने उन्नत हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए राज्य की पहली ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। इस अत्याधुनिक उपचार में भारत में विकसित MYVAL ट्रांसकैथेटर हार्ट वॉल्व सिस्टम का उपयोग किया गया, जिससे गंभीर हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा सका।

यह जटिल प्रक्रिया डॉ. सिनरंग वारजरी के नेतृत्व में संपन्न हुई, जबकि देश के वरिष्ठ स्ट्रक्चरल हार्ट विशेषज्ञ डॉ. जॉय शोम ने प्रॉक्टर के रूप में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। इस उपलब्धि के साथ मेघालय अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां अत्याधुनिक स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं।

TAVI एक मिनिमली इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) तकनीक है, जिसका उपयोग गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित मरीजों के इलाज में किया जाता है। पहले इस बीमारी के उपचार के लिए ओपन-हार्ट सर्जरी ही प्रमुख विकल्प थी, लेकिन TAVI तकनीक से कम जोखिम, तेज रिकवरी और बेहतर परिणाम मिलते हैं।

इस सफलता पर डॉ. सिनरंग वारजरी ने कहा कि यह उपलब्धि मेघालय की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि अब राज्य और पूर्वोत्तर भारत के मरीजों को उन्नत हृदय उपचार के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

वहीं, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जॉय शोम ने कहा कि मेघालय में पहली TAVI प्रक्रिया का सफल होना इस बात का प्रमाण है कि पूर्वोत्तर भारत के चिकित्सा संस्थान अब जटिल कार्डियक प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक करने में सक्षम हो रहे हैं। इससे मरीजों की यात्रा का बोझ कम होगा और उच्च गुणवत्ता वाली हृदय चिकित्सा अधिक सुलभ बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल एक चिकित्सा सफलता नहीं, बल्कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण और स्वदेशी मेडिकल टेक्नोलॉजी की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक है। इससे छोटे राज्यों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी अत्याधुनिक इलाज की पहुंच मजबूत होगी तथा देश में समान स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।


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