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भारत की वो नदी जहां छठ पूजा पर है पाबंदी, नहीं कर सकते अर्घ्य, जानें क्या है वजह...

छठ पर्व सूर्य उपासना का अनूठा त्योहार है जिसमें ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समापन होता है।

भारत की वो नदी जहां छठ पूजा पर है पाबंदी, नहीं कर सकते अर्घ्य, जानें क्या है वजह...
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New Delhi : नई दिल्ली। भारत में छठ पूजा का विशेष महत्व है, जिसे महापर्व का दर्जा दिया गया है। चार दिन तक चलने वाले इस पवित्र पर्व में लोग नदियों, तालाबों और जलाशयों में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। छठ पर्व सूर्य उपासना का अनूठा त्योहार है जिसमें ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समापन होता है।


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हालांकि, भारत में एक नदी ऐसी भी है, जहां छठ पूजा करने पर सख्त पाबंदी है। यह नदी है दिल्ली में बहने वाली यमुना नदी। यमुनोत्री से निकलने वाली यमुना जब दिल्ली पहुंचती है, तो इस पर छठ करने की मनाही है। दिल्ली सरकार ने सुरक्षा और स्वच्छता कारणों से यमुना में छठ पूजा करने पर प्रतिबंध लगा रखा है।


New Delhi : यमुना नदी में क्यों नहीं कर सकते छठ पूजा?

New Delhi : 1. दलदली इलाकों का खतरा
यमुना नदी में कई स्थानों पर दलदली क्षेत्र हैं, जहां पानी में खड़े होने पर दुर्घटना की आशंका रहती है। छठ पूजा के दौरान जल में खड़े होने की परंपरा होती है, जिससे इन दलदली क्षेत्रों में हादसे का खतरा बना रहता है। इसी कारण, यमुना नदी में छठ पूजा को लेकर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके बजाय, यमुना किनारे बनाए गए कृत्रिम घाटों पर छठ व्रतियों को अर्घ्य देने की अनुमति दी जाती है।


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2. प्रदूषण की समस्या
दिल्ली में यमुना नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित है। कई औद्योगिक इकाइयों और कारखानों का कचरा सीधा यमुना में बहाया जाता है, जिसके कारण इसमें सफेद झाग दिखाई देते हैं। इस प्रदूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के पानी में छठ करने पर रोक लगाई है, ताकि लोगों की सुरक्षा बनी रहे।


New Delhi : हालांकि, कई संस्थाएं और संगठन समय-समय पर इस पाबंदी को हटाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन फिलहाल प्रदूषण और सुरक्षा के मद्देनजर यह प्रतिबंध जारी है। यमुना के किनारे बने कृत्रिम घाटों पर ही छठ व्रतियों को अर्घ्य देने की सुविधा दी जाती है, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से महापर्व का पालन कर सकें।

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