MP Board : बोर्ड एग्जाम पास करने वाली छात्राओं के लिए खुशखबरी! ‘गांव की बेटी’ योजना के तहत मिलेंगे 5,000 से 7,500 रुपये
MP Board : भोपाल: मध्य प्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र की मेधावी छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘गांव की बेटी’ योजना के तहत 12वीं पास करने वाली ग्रामीण छात्राओं को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। योजना के अंतर्गत छात्राओं को 5,000 रुपये से लेकर 7,500 रुपये तक की मदद मिलेगी।
MP Board : फर्स्ट डिवीजन अनिवार्य
‘गांव की बेटी’ योजना का लाभ केवल उन्हीं ग्रामीण छात्राओं को मिलेगा जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन यानी कम से कम 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को उच्च शिक्षा पूरी करने में मदद पहुंचाना है, ताकि वे आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर न हों।
MP Board : कितनी मदद और कैसे मिलेगी राशि?
साधारण ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को हर महीने 500 रुपये मिलेंगे। यह राशि 10 महीनों तक दी जाएगी, यानी कुल 5,000 रुपये। इंजीनियरिंग, मेडिकल या अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाली छात्राओं को हर महीने 750 रुपये दिए जाएंगे, यानी कुल 7,500 रुपये। यह राशि सीधे छात्रा के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य जरूरतें आसानी से पूरी कर सकें।
MP Board : आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए छात्राओं को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
आधार कार्ड
एक्टिव मोबाइल नंबर
12वीं की मार्कशीट
‘गांव की बेटी’ प्रमाण पत्र
निवास प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र
बैंक पासबुक
कॉलेज का आईडी कार्ड
MP Board : आवेदन कैसे करें?
छात्राएं ऑनलाइन तरीके से आसानी से आवेदन कर सकती हैं। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट scholarshipportal.mp.nic.in पर जाएं। रजिस्ट्रेशन करें और ‘Gaon Ki Beti Yojana 2026’ विकल्प चुनें। अपनी शैक्षणिक जानकारी भरें और सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें। फॉर्म पूरा होने के बाद रसीद कॉलेज में जमा कर दें। मध्य प्रदेश सरकार की यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को सशक्त बनाने और उन्हें उच्च शिक्षा की ओर प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी मेधावी बेटी आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े।

