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महिलाओं के हक में महिला कांग्रेस चलाएगी नारी न्याय आंदोलन : विभा पटेल
- VP B
- 27 Aug, 2024
विभा पटेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में देश और मध्य प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में लगातार वृद्धि होना शर्मनाक
भोपाल। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस प्रदेश की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए नया आंदोलन शुरू करने जा रही है। इसको नारी न्याय आंदोलन नाम दिया गया है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विभा पटेल ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा नारी न्याय आंदोलन पूरी ताकत से गांव-गांव तक चलाया जायेगा। जिसकी शुरुआत अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने गत 29 जुलाई 2024 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर से कर दी हैं, मध्य प्रदेश में इसका विस्तार शहरी और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं तक किया जायेगा। जिसका उद्देश्य आधी आबादी (महिलाओं) के लिए हक मांगना है।
साथ ही महिला आरक्षण, जातीय जनगणना, बढ़ती महंगाई और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दों को लेकर जन जागरण भी चलाया जायेगा। अभियान में समान वेतन, बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता, लाड़ली बहनों को मुफ्त में कॉलेज तक शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई जाएगी। पटेल ने कहा कि महिलाओं को इस आंदोलन में जोड़ने के लिए जिला, ब्लाक, बूथ स्तर पर महिलाओं को जोड़कर, महिला अपराध, बेलगाम महंगाई के खिलाफ ‘‘नारी न्याय आंदोलन’’ चलाकर महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके हक के लिए प्रदेश की कुंभकर्णी नींद में सोयी सरकार को जगाने का काम किया जायेगा।
बीजेपी के राज में महिलाओं के साथ हो रहा है निरंतर अपराध
विभा पटेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में देश और मध्य प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में लगातार वृद्धि होना शर्मनाक और बेहद चिंताजनक हैं। कई मामलों में सामने आया है कि भाजपा के कार्यकर्ता महिलाओं या नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में शामिल होना पाये गये हैं, लेकिन सत्ताधारी पार्टी से जुड़े होने के कारण वे सींखचों में जाने और कानून के सिकंजे से बच जाते हैं। ऐसे कई मामलों में पीड़िता या उसका परिवार सत्ता पक्ष के डर से पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता है।
इतना ही नहीं बेलगाम महंगाई ने महिलाओं की कमर तोड़ दी है, जिससे रसोई से लेकर घर-गृहस्थी के अन्य कामों में जिसका सीधा असर महिलाओं पर ही पड़ रहा है, जिससे परिवार चलाना और जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है, महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन भी नहीं मिल रहा। पौष्टिक आहार व स्वच्छता की कमी से वे बीमार पड़ रहीं हैं। बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं है।
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