Indus Water Treaty: भारत ने रखी सिंधु जल संधि में संशोधन की मांग, पाकिस्तान ने नहीं दिया नोटिस का जवाब
नई दिल्ली। Indus Water Treaty: भारत ने पाकिस्तान को कहा है कि वह सिंधु जल संधि में संशोधन चाहता है, जो दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे से संबंधित एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता 1960 में पंडित नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच कराची में हस्ताक्षरित हुआ था। हाल ही में, भारत ने 30 अगस्त को इस संधि की समीक्षा और संशोधन की मांग करते हुए पाकिस्तान को नोटिस भेजा है।
इसलिए संशोधन जरूरी
भारत का कहना है कि जब यह संधि की गई थी, तब की परिस्थितियाँ आज की स्थिति से काफी अलग हैं। भारत की जनसंख्या में वृद्धि, खेती के तरीके में बदलाव, और ऊर्जा उत्पादन के लिए पानी के इस्तेमाल की आवश्यकता के कारण इस संधि में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद भी इस समझौते के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
Indus Water Treaty: बता दें कि सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों के जल बंटवारे पर आधारित है। इस संधि के तहत, पूर्वी नदियां रावी, सतलुज, और ब्यास का पानी भारत को और पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम, और चिनाब का पानी पाकिस्तान को मिलना निर्धारित है। इस संधि के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए सिंधु जल आयोग का गठन किया गया है, जिसकी बैठकें सालाना होती हैं।
Indus Water Treaty: पाकिस्तान ने नहीं दी है प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह माना जा रहा है कि वह इस संशोधन के खिलाफ हो सकता है, क्योंकि इस समझौते के अनुसार उसे काफी लाभ प्राप्त होता है। पानी के बंटवारे को लेकर पहले से ही भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद जारी है, और यह नया कदम इस विवाद को और बढ़ा सकता है।
Indus Water Treaty: क्या है भारत नजरिया
विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने हमेशा सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत के कई जल विद्युत परियोजनाओं का विरोध किया है। पाकिस्तान से भारत में आतंकवादी हमले होते रहे हैं, और जम्मू-कश्मीर के लोग महसूस करते हैं कि सिंधु जल संधि में उनके हितों की अनदेखी की गई है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को भी लगता है कि वे सिंधु नदी के पानी का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

